Bihar Health Department: राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और मरीजों के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने की दिशा में बिहार स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों को ओपीडी में मरीजों का 100% डिजिटल पंजीकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने इस संबंध में सख्त आदेश जारी किए हैं।
अस्पतालों से कहा गया है कि वे आभा (ABHA) आधारित पंजीकरण, इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (EHR) का निर्माण, ऑनलाइन परामर्श और डॉक्टरों की ऑनलाइन उपस्थिति की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करें। इसके साथ ही, इनडोर मरीजों (IPD) के लिए भव्य पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है।
अनावश्यक रेफरल पर लगेगी रोक, मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाने पर जोर
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को रेफरल प्रणाली की नियमित निगरानी करने और अनावश्यक रेफरल से बचने का भी निर्देश दिया है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि मरीजों को केवल तभी रेफर किया जाए जब विशेषज्ञ उपचार या विशेष सुविधाओं की आवश्यकता हो। बैठक में अस्पतालों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को रोकने के उपायों की भी समीक्षा की गई। विभाग ने अधिकारियों को देखभाल में सुधार के लिए हर स्तर पर काम करने का निर्देश दिया और कहा कि लापरवाही के मामलों में कार्रवाई की जाएगी। आशा कार्यकर्ताओं के चयन की भी समीक्षा की गई, जिसमें अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार भर्ती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
जिला अस्पतालों में बढ़ेंगी विशेषज्ञ सेवाएं, टीबी मुक्त अभियान भी जारी
बैठक में जिला अस्पतालों को सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल सेंटर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशेष मेडिकल सेंटर के रूप में विकसित करने की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने टीबी-मुक्त बिहार और एनीमिया-मुक्त बिहार अभियानों पर भी चर्चा की, जिसमें इन जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर लगातार ध्यान केंद्रित रखने के निर्देश दिए गए। इस बैठक में बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन और राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यकारी निदेशक अमित कुमार पांडे सहित कई अधिकारी उपस्थित थे।
सरकारी अस्पतालों में बढ़ी सर्जरी की संख्या, आयुष्मान भारत का भी बढ़ा लाभ
समीक्षा बैठक में जिला अस्पतालों में सर्जिकल सेवाओं का भी जायजा लिया गया। बैठक के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों से पता चला कि जिला अस्पतालों में सर्जरी की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है।
- जून 2026 में 2,428 सर्जरी की गईं।
- जुलाई में यह संख्या बढ़कर 5,650 हो गई।
- अगस्त में कुल 8,209 सर्जरी की गईं।
आयुष्मान भारत योजना के तहत भी सर्जरी के दावों में वृद्धि देखी गई।
- जून में 1,000 दावे किए गए।
- जुलाई में 1,331 दावे किए गए।
- अगस्त में 1,626 दावे किए गए।
इन आंकड़ों की समीक्षा स्वास्थ्य सेवाओं के आकलन और जिला-स्तरीय अस्पतालों में उपचार सुविधाओं के विस्तार के हिस्से के रूप में की गई।
अस्पतालों में सुधार कार्य 31 अक्टूबर तक पूरा करने का निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को अस्पतालों में चल रहे मरम्मत और सुधार कार्यों को 31 अक्टूबर तक पूरा करने का भी निर्देश दिया है। इन कार्यों में पेंटिंग, छोटी-मोटी मरम्मत, पीने के पानी की सुविधा, शौचालय, प्रतीक्षालय, नर्सिंग डेस्क और अन्य मरीज सुविधाएं शामिल हैं। विभाग के अनुसार, वर्तमान में 36 जिला अस्पतालों, 56 अनुमंडल अस्पतालों, 49 रेफरल अस्पतालों, 332 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, 110 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 147 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 844 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में काम चल रहा है।
ये निर्देश बिहार की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की व्यापक समीक्षा के तहत डिजिटल पंजीकरण, रोगी रिकॉर्ड प्रबंधन, रेफरल निगरानी, अस्पताल के बुनियादी ढांचे और सेवा वितरण को बेहतर बनाने पर केंद्रित हैं। इन कदमों से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।







