Darbhanga News: बिहार में व्यापारियों पर बढ़ते बोझ को लेकर दरभंगा में गुस्सा भड़क उठा है। चैंबर ऑफ कॉमर्स ने यूपीआई पर प्रस्तावित शुल्क को व्यापारियों के साथ अन्यायपूर्ण कदम बताया है, जिसे तत्काल वापस लेने की मांग की गई है। संस्था ने इस फैसले को व्यापारी विरोधी करार दिया है, जिससे व्यापारी वर्ग में गहरी नाराजगी व्याप्त है।
दरभंगा चैंबर ऑफ कॉमर्स की एक अति महत्वपूर्ण बैठक में यूपीआई शुल्क पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग की गई। बैठक में संस्था के अध्यक्ष पवन कुमार सुरेका, प्रधान सचिव सुशील कुमार जैन, सचिव अभिषेक चौधरी, कोषाध्यक्ष मुकेश खेतान और संरक्षक अजय कुमार पोद्दार, विनोद कुमार साह एवं कृष्ण देव शाह सहित कई प्रमुख सदस्यों ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि जब देश में डिजिटल भुगतान को राष्ट्रीय अभियान बनाकर बढ़ावा दिया गया, तब व्यापारियों ने पूरा सहयोग किया। उन्होंने अपने प्रतिष्ठानों में क्यूआर कोड लगाकर यूपीआई, क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान को प्रोत्साहन दिया, जिससे आज डिजिटल भुगतान भारतीय अर्थव्यवस्था की पहचान बन चुका है।
व्यापारियों पर दोहरी मार: नकदी और डिजिटल दोनों पर शुल्क
व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब उन्हीं पर इसका बोझ डालना बिल्कुल अनुचित है। यदि कोई व्यापारी नकद में माल बेचता है, तो बैंक ‘कैश हैंडलिंग चार्ज’ के नाम पर एक अच्छी-खासी रकम काट लेते हैं। वहीं, अगर वह क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या यूपीआई से भुगतान लेता है, तो उसे अपनी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा फिर से चुकाना पड़ता है। सरकार इसे किस आधार पर न्यायसंगत ठहरा सकती है, यह समझ से परे है।
व्यापारियों की सरकार कहे जाने वाले इस शासनकाल में सारा अत्याचार और सारा शुल्क केवल व्यापारियों के माथे पर डाला जाता है। यह पीड़ादायक है।
चैंबर ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि ‘व्यापारियों की सरकार’ कहे जाने वाले इस शासनकाल में सारा अत्याचार और शुल्क केवल व्यापारियों पर डाला जाता है। यह बोझ विभिन्न माध्यमों से डाला जा रहा है, जिसमें लाइसेंस और निबंध, जीएसटी, इनकम टैक्स, प्रोफेशनल टैक्स, ट्रेड लाइसेंस शुल्क और कचरा टैक्स जैसे कई शुल्क शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, फूड लाइसेंस, ड्रग लाइसेंस, नापतोल विभाग और श्रम विभाग से जुड़े जायज-नाजायज लेनदेन भी व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब बनते हैं। जीएसटी रिटर्न या आईटी रिटर्न की ऑडिट रिपोर्ट फाइल करने में देरी होने पर लगने वाले बड़े जुर्माने की राशि भी व्यापारियों पर भारी पड़ती है।
शीर्ष नेताओं से की गई तत्काल हस्तक्षेप की मांग
चैंबर ने इस अन्यायपूर्ण निर्णय के खिलाफ वित्त मंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाजपा के प्रांतीय अध्यक्ष, बिहार के मुख्यमंत्री, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और संजय झा जैसे शीर्ष नेताओं से संवाद किया है। उनसे मांग की गई है कि इस अन्यायपूर्ण निर्णय को अविलंब समाप्त किया जाए। व्यापारियों ने सरकार से अपील की है कि वह एनडीए सरकार के साथ व्यापारियों के सौहार्दपूर्ण संबंध को कायम रखने के लिए अपनी ओर से नई पहल करे और इस शुल्क को तुरंत वापस ले।







