Bihar Election Re-election: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दोबारा कराने की मांग की है। उन्होंने बुधवार को पटना में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया कि अगर सही तरीके से चुनाव कराए जाएं तो भाजपा कहीं नहीं टिक पाएगी।
तेजस्वी यादव ने वोटर लिस्ट के रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया पर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाए गए सवालों का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने जमीन पर चुनाव नहीं हारा, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इलेक्शन के परिणाम तय किए थे।
2020 और 2025 के चुनाव में धांधली का दावा
राजद नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया कि 2020 के बिहार चुनाव में भी कथित हेरफेर करके उन्हें हराया गया था। उन्होंने आगे कहा कि यही स्क्रिप्ट 2025 के बिहार चुनाव में भी दोहराई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए, लोगों को पैसे बांटे गए और मतगणना में भी हेरफेर की गई।
‘2020 के बिहार चुनाव में भी उन्हें कथित हेरफेर करके हराया गया था। इसके बाद 2025 के बिहार चुनाव में भी वही स्क्रिप्ट दोहराई गई।’
चुनाव आयोग पर उठाए सवाल, बताया ‘कठपुतली’
तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे धोखाधड़ी वाले हैं, इसलिए दोनों राज्यों में नए सिरे से पारदर्शी चुनाव होने चाहिए।
‘चुनाव आयोग सरकार की कठपुतली बन गया है। आयोग का गलत इस्तेमाल कर भाजपा सत्ता में आई है। विपक्ष की सरकार बनेगी तो गलत करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।’
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को अनसुना करने का आरोप लगाया। तेजस्वी ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की प्रेस विज्ञप्ति में भी ‘गोलमटोल बातें’ की गई हैं। उन्होंने 1995 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयोग एक बहुमत की संस्था है और सभी आयुक्त बराबर होते हैं, लेकिन अब यह संतुलन बिगड़ गया है।
सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी निशाना
राजद नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए दोनों चुनाव आयुक्तों के अधिकार क्षेत्र को सीमित कर दिया।
‘पहले मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की भूमिका थी। मगर केंद्र सरकार ने कानून में संशोधन कर चयन समिति की संरचना बदल दी। उसमें सीजेआई की जगह कैबिनेट मंत्री को शामिल कर दिया गया।’
तेजस्वी यादव ने सीधे तौर पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार समेत हाल ही में हुए जिन भी राज्यों में विपक्ष की हार हुई, वह जनता के जनादेश का परिणाम नहीं था, बल्कि विपक्ष को जानबूझकर हराया गया था। उनके इन आरोपों से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।








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