Bhagalpur Fishing Rights: बिहार के नाथनगर में भागलपुर के रामपुर खुर्द और बिहारीपुर के बीच मछली मारने के अधिकार को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है। करीब दस दिनों से चल रहे इस तनाव के बाद दोनों पक्ष नाथनगर अंचल कार्यालय पहुंचे, जहां अंचलाधिकारी मनोहर कुमार के समक्ष उन्होंने अपने-अपने दावे पेश किए। यह विवाद एक जलभराव वाली भूमि पर मछली पकड़ने के हक और उससे होने वाले राजस्व की हिस्सेदारी को लेकर दशकों पुराना है, जिस पर अब प्रशासन ने हस्तक्षेप किया है।
भागलपुर में 50 साल पुराना मछली विवाद! अब प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला, किसकी होगी जीत?
Bhagalpur Fishing Rights: बिहार के भागलपुर जिले में मछली मारने के अधिकार को लेकर दो गांवों के बीच दशकों पुराना विवाद एक बार फिर गहरा गया है। नाथनगर स्थित रामपुर खुर्द और बिहारीपुर के ग्रामीण करीब 10 दिनों से इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। इस गंभीर टकराव के बाद प्रशासन हरकत में आया है और अब इस जल विवाद को सुलझाने के लिए स्थल जांच का फैसला किया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों ने नाथनगर अंचल कार्यालय में अंचलाधिकारी मनोहर कुमार के सामने अपना-अपना पक्ष रखा। बिहारीपुर पक्ष ने दावा किया कि वे करीब 50 वर्षों से इस जलकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, रामपुर खुर्द पक्ष ने उस जलभराव वाली जमीन को अपने क्षेत्र का बताते हुए मछली मारने और उससे होने वाले राजस्व में हिस्सेदारी पर अपना अधिकार जताया है। दोनों गांवों की दलीलों के चलते देर शाम तक अंचल कार्यालय में सुनवाई चलती रही, लेकिन तत्काल कोई फैसला नहीं हो सका।
दशकों पुराना दावा और राजस्व का पेच
यह विवाद केवल मछली पकड़ने के अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जलभराव वाली जमीन के स्वामित्व और उससे होने वाली आय पर भी दावा शामिल है। बिहारीपुर पक्ष का कहना है कि वे लंबे समय से इस जलकर का उपयोग कर रहे हैं और इससे होने वाली आय का इस्तेमाल समाज कल्याण के कार्यों में भी किया जाता है। दूसरी ओर, रामपुर खुर्द पक्ष का तर्क है कि जलभराव वाला क्षेत्र उनकी जमीन का हिस्सा है, इसलिए मछली पकड़ने और राजस्व पर पहला हक उनका ही है।
अंचलाधिकारी का सख्त रुख: बिना जांच नहीं होगा फैसला
अंचलाधिकारी मनोहर कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा, ‘लंबे समय से दूसरे पक्ष के दखल और उपयोग की बात सामने आई है, वहीं जमीन के स्वामित्व को लेकर भी नया दावा किया गया है। ऐसे में कागजात और मौके की स्थिति देखे बिना निर्णय लेना संभव नहीं है।’
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना मौके की स्थिति और दस्तावेजों की जांच किए कोई भी निर्णय लेना उचित नहीं होगा। इस बयान के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई का निर्णय लिया है।
गुरुवार को होगा विवादित स्थल का निरीक्षण
अंचलाधिकारी के निर्देश पर प्रशासन अब गुरुवार को विवादित जलक्षेत्र का स्थल निरीक्षण करेगा। यह टीम मौके पर जाकर जमीन और जलभराव की वास्तविक स्थिति का जायजा लेगी। इसके साथ ही, राजस्व अभिलेखों की भी गहन जांच की जाएगी ताकि जमीन के स्वामित्व और जलकर से जुड़े पुराने रिकॉर्ड्स को सत्यापित किया जा सके।
इस निरीक्षण और दस्तावेज़ सत्यापन के बाद ही वास्तविक स्थिति और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उम्मीद है कि प्रशासन की यह पहल दशकों पुराने इस विवाद का स्थायी समाधान निकाल पाएगी, जिससे दोनों गांवों के बीच शांति और सौहार्द स्थापित हो सके।
50 साल पुराना दावा: नाथनगर विवाद में राजस्व पर हिस्सेदारी की मांग
अंचल कार्यालय में सुनवाई के दौरान बिहारीपुर पक्ष ने दावा किया कि वे करीब 50 वर्षों से इस ‘जलकर’ का उपयोग कर रहे हैं और इससे होने वाली आय का इस्तेमाल समाज कल्याण के कार्यों में किया जाता है। वहीं, रामपुर खुर्द पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि जलभराव वाली यह जमीन उनके क्षेत्र में आती है, इसलिए मछली मारने और राजस्व में हिस्सेदारी का अधिकार उनका है। दोनों पक्षों की दलीलों के कारण देर शाम तक अंचल कार्यालय में गहमा-गहमी बनी रही।
अंचलाधिकारी की दो टूक: बिना जांच संभव नहीं फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए अंचलाधिकारी मनोहर कुमार ने तत्काल कोई फैसला नहीं सुनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस जटिल मुद्दे पर बिना पूरी जांच-पड़ताल के कोई निर्णय लेना संभव नहीं है। अंचलाधिकारी ने कहा:
‘लंबे समय से दूसरे पक्ष के दखल और उपयोग की बात सामने आई है, वहीं जमीन के स्वामित्व को लेकर भी नया दावा किया गया है। ऐसे में कागजात और मौके की स्थिति देखे बिना निर्णय लेना संभव नहीं है।’
यह दर्शाता है कि प्रशासन इस मामले में किसी भी जल्दबाजी से बचना चाहता है और निष्पक्ष समाधान की दिशा में बढ़ रहा है।
गुरुवार को होगा स्थल निरीक्षण, राजस्व अभिलेखों की भी जांच
इस विवाद को सुलझाने के लिए प्रशासन ने गुरुवार को विवादित जलक्षेत्र का स्थल निरीक्षण करने का फैसला किया है। एक प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंचकर जमीन और जलभराव की वास्तविक स्थिति का जायजा लेगी। इसके साथ ही, राजस्व अभिलेखों की भी गहन जांच की जाएगी ताकि जमीन के स्वामित्व और उपयोग के संबंध में स्पष्टता आ सके। इन सभी तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर ही नियमानुसार अंतिम कार्रवाई की जाएगी, जिससे इस दशकों पुराने मछली मारने के अधिकार विवाद का स्थायी निपटारा हो सके।







