sitamarhi anchal office: बिहार के सीतामढ़ी जिले से सरकारी लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां बेलसंड अंचल कार्यालय ने एक जीवित व्यक्ति मोहम्मद इदरीश को अपने सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया है। इस गंभीर चूक ने न केवल पीड़ित परिवार को सदमे में डाल दिया है, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह पूरा मामला बेलसंड प्रखंड के चैनपुर गांव से जुड़ा है, जहां के निवासी मोहम्मद इदरीश ने अपनी पुश्तैनी जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लिए अंचल कार्यालय में आवेदन जमा किया था। बताया गया है कि मोहम्मद इदरीश गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उन्होंने अपनी संपत्ति का उचित बंटवारा बच्चों के बीच करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया था, ताकि उनके बाद परिवार में किसी तरह का विवाद न हो।
पुश्तैनी जमीन के दाखिल-खारिज का आवेदन बना ‘मौत’ का फरमान
पीड़ित परिवार का आरोप है कि अंचल कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बिना किसी स्थलीय जांच या दस्तावेजों के सत्यापन के ही बड़ी लापरवाही बरती। जमीनी हकीकत जाने बिना ही मोहम्मद इदरीश को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। जब इस चौंकाने वाली जानकारी से परिवार को अवगत कराया गया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि एक जिंदा इंसान को कागजों में कैसे ‘मारा’ जा सकता है।
“अंचल कार्यालय के स्तर से बिना किसी स्थलीय जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के ही बड़ी लापरवाही बरती गई। अधिकारियों और कर्मचारियों ने बिना जमीनी हकीकत जाने मोहम्मद इदरीश को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया।”
अब यह परिवार न्याय की उम्मीद में अंचल अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर है। एक तरफ सरकार बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों को राजस्व से जुड़ी सुविधाएं उनके घर तक पहुंचाने के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की बड़ी चूक सरकारी कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
बिना जांच-पड़ताल, सरकारी रिकॉर्ड में ‘जिंदा’ कैसे हुआ ‘मृत’?
यह मामला जब मीडिया की सुर्खियों में आया और तूल पकड़ने लगा, तब प्रशासनिक महकमे में हलचल हुई। बेलसंड के अंचल अधिकारी (CO) अशोक कुमार ने इस घटना को ‘भूलवश हुई गलती’ बताया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस त्रुटि में सुधार कर लिया जाएगा।
“भूलवश हुई गलती है, जल्द ही इस त्रुटि में सुधार कर लिया जाएगा।” — अंचल अधिकारी अशोक कुमार
लापरवाही पर सीओ की सफाई, पर सवाल बरकरार
हालांकि, अंचल अधिकारी के आश्वासन के बावजूद, यह घटना सरकारी सिस्टम की कार्यशैली और उसकी जवाबदेही पर कई सवाल खड़े करती है। यह दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी ‘भूल’ आम आदमी के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन सकती है और उसे न्याय के लिए दर-दर भटकने पर मजबूर कर सकती है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि भविष्य में ऐसी गंभीर लापरवाहियां न हों।







