Bihar POCSO Act: दरभंगा में एक आठ वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के प्रयास और गंदी नीयत से छेड़खानी के एक जघन्य मामले में न्याय का पहिया घूम गया है। पॉक्सो की विशेष न्यायाधीश सुलेखा झा की अदालत ने आरोपी लक्ष्मी चौपाल को सात साल की सश्रम कारावास और पचास हजार रुपये अर्थदंड की कठोर सजा सुनाई है। यह फैसला गुरुवार को सुनाया गया, जिससे पीड़ित बच्ची और उसके परिवार को बड़ी राहत मिली है।
पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मिली सजा
अभियोजन पक्ष का संचालन कर रहे पॉक्सो के स्पेशल पीपी विजय कुमार पराजित ने अदालत को बताया कि आरोपी लक्ष्मी चौपाल पर बहेड़ा थानाकांड सं. 254/15 (जीआर नं.15/2015) के तहत आरोप थे। अदालत ने 14 सितंबर को ही अभियुक्त को पॉक्सो ऐक्ट की धारा 6/18 और 10 के तहत दोषी करार दिया था। लक्ष्मी चौपाल को धारा 6/18 में सात साल की सश्रम कारावास और धारा 10 में छह साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
पॉक्सो के स्पेशल पीपी विजय कुमार पराजित ने बताया कि बहेड़ा थानाकांड सं. 254/15 से बने जीआर नं.15/2015 की सुनवाई पूरी कर कोर्ट ने 14 सितम्बर को अभियुक्त को पॉक्सो ऐक्ट की धारा 6/18 एवं 10 में दोषी करार दिया था।
फरार आरोपी की गिरफ्तारी और लंबी कानूनी लड़ाई
अदालत में ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 8 गवाहों की गवाही पेश की। इसके साथ ही कई दस्तावेजी सबूत भी प्रस्तुत किए गए, जिससे अभियुक्त का जूर्म साबित करने में सफलता मिली। आरोपी लक्ष्मी चौपाल ट्रायल के दौरान फरार हो गया था, जिस कारण विचारण पूरा करने में विलंब हुआ। पुलिस ने उसे 13 जून 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया था, जिसके बाद से वह जेल में बंद है।
पीड़ित बच्ची को मिलेगा 50 हजार का मुआवजा
इस फैसले के साथ ही अदालत ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पीड़ित बच्ची के पुनर्वास के लिए पचास हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया है। यह राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकार दरभंगा द्वारा भुगतान की जाएगी। यह कदम पीड़ित बच्ची को एक नया जीवन शुरू करने में मदद करेगा और समाज में ऐसे अपराधों के खिलाफ एक कड़ा संदेश भी देगा।







