Bihar Dinkar Jayanti: बिहार के जाले में राष्ट्रकवि रामधारी ‘दिनकर’ की 117वीं जयंती पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। महाकवि कालिदास सूर्यदेव महाविद्यालय, त्रिमुहान-चंदौना में हुए इस कार्यक्रम में ‘दिनकर का ओज और समकालीन प्रासंगिकता’ विषय पर गहन चर्चा हुई। इस अवसर पर वक्ताओं ने दिनकर के साहित्य में निहित राष्ट्रबोध, सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदना और आत्मसम्मान के सशक्त स्वरों को प्रमुखता से रेखांकित किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सिद्धार्थ शंकर सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि दिनकर का साहित्य भारतीय समाज की चेतना, संघर्ष, स्वाभिमान और मानवीय मूल्यों का प्रबल प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने वर्तमान सामाजिक संदर्भों में नई पीढ़ी को दिनकर के साहित्य और उनके विचारों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
दिनकर का ओज और समकालीन प्रासंगिकता
राजकीय डिग्री महाविद्यालय, बिस्फी की प्राचार्या डॉ. ममता पाण्डेय ने अपने संबोधन में दिनकर की रचनाओं में विद्यमान राष्ट्रबोध, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदना के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे दिनकर का लेखन आज भी प्रासंगिक है। राजकीय डिग्री महाविद्यालय, गोविंदपुर, नवादा के प्राचार्य डॉ. जितेन्द्र कुमार ने दिनकर के काव्य में छिपे ओज, संघर्ष और उनकी जीवन-दृष्टि की विस्तृत चर्चा की।
डॉ. जितेन्द्र कुमार ने कहा, ‘उनकी रचनाएं युवाओं को चुनौतियों का सामना करने और समाज व राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को समझने की प्रेरणा देती हैं।’
इस कार्यक्रम में डॉ. लाल बाबू सहनी और डॉ. आफताब आलम ने भी अपने विचार साझा किए। मंच का संचालन डॉ. ज्योतीन्द्र कुमार ने कुशलतापूर्वक किया, जबकि डॉ. खुशबू कुमारी ने उपस्थित सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
छात्रों और शिक्षकों ने लिया हिस्सा
IQAC के तत्वावधान में आयोजित इस जयंती समारोह में राकेश कुमार कापर सहित महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त, कई प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से भी अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। इस आयोजन ने दिनकर के कालजयी विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास किया।







