Darbhanga Dowry Death: दरभंगा में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए अदालत ने दहेज हत्या के एक दोषी पति को आठ साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। पत्नी की जान लेने वाले प्रमोद माली को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय संतोष कुमार पांडेय की अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (बी) के तहत दोषी करार दिया। यह मामला मनीगाछी थाना क्षेत्र का है, जहां दहेज के लिए एक महिला को मौत के घाट उतार दिया गया था।
लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मधुबनी जिले के रुद्रपुर थाना अंतर्गत महरैल गांव निवासी उपेंद्र माली ने अपनी पुत्री ललिता देवी का विवाह वर्ष 2005 में मनीगाछी थाना क्षेत्र के महथौर निवासी स्वर्गीय फौदार माली के पुत्र प्रमोद माली के साथ किया था। विवाह के बाद ललिता के ससुराल वालों ने दहेज के रूप में 50,000 रुपये और 4 भरी सोने की मांग शुरू कर दी।
दहेज की यह मांग पूरी न होने पर ससुराल वाले ललिता देवी के साथ लगातार मारपीट करते थे। इस क्रूरता का अंत 25 अक्टूबर 2010 को हुआ, जब उपेंद्र माली को सूचना मिली कि उनकी पुत्री की हत्या कर दी गई है। इस घटना के बाद सूचक उपेंद्र माली के बयान पर मनीगाछी थाना में कांड संख्या 182/2010 दर्ज किया गया, जिसमें प्रमोद माली, गीता देवी और फौदार माली को आरोपी बनाया गया था।
दहेज की मांग बनी मौत की वजह
दहेज की लोभ में ललिता देवी की जान ले ली गई। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी बबीता कुमारी ने मजबूती से पक्ष रखा। इस दौरान कुल सात गवाहों की गवाही कराई गई, जिन्होंने घटना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत किए। न्यायाधीश संतोष कुमार पांडेय की अदालत ने सभी सबूतों और गवाहों के बयानों पर गौर करते हुए 13 मई 2011 को आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे।
विचारण के दौरान दो आरोपियों की मौत
इस मामले के विचारण के दौरान दो आरोपियों, गीता देवी और फौदार माली, की मृत्यु हो गई। इसके बाद, न्यायालय में यह मामला सत्रवाद संख्या 164/2011 के तहत केवल प्रमोद माली के खिलाफ चलता रहा। सभी कानूनी प्रक्रियाओं और सुनवाई के बाद, गुरुवार को न्यायाधीश संतोष कुमार पांडेय की अदालत ने प्रमोद माली को दहेज हत्या का दोषी पाया और उन्हें आठ साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो दहेज जैसी कुप्रथा को बढ़ावा देते हैं। अदालत का यह निर्णय समाज में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों पर रोक लगाने और न्याय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।







