Bihar Water Resource Corporation: बिहार में अब जल संसाधनों से कमाई करने की एक नई पहल शुरू हो गई है. राज्य सरकार ने बिहार जल संसाधन विकास निगम लिमिटेड को सक्रिय करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. यह निगम सिर्फ सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के पारंपरिक कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल परियोजनाओं से जुड़ी ऐसी गतिविधियां भी शुरू करेगा जिनसे राजस्व जुटाया जा सके.
निगम का लक्ष्य धीरे-धीरे एक ऐसा तंत्र विकसित करना है जिससे वह अपने खर्चों के लिए स्वयं राजस्व उत्पन्न कर सके. इसके लिए पानी से जुड़े कई नए क्षेत्रों में काम किया जाएगा. इनमें गाद प्रबंधन, जलस्रोतों का दोबारा विकास और सतही पानी को पेयजल के लायक बनाने के लिए आवश्यक संरचनाएं तैयार करना शामिल है.
रिवर फ्रंट से सरकारी जमीन तक, कमाई के नए रास्ते
इस नए मॉडल का दायरा सिर्फ पानी तक ही सीमित नहीं है. निगम को रिवर इंटरलिंकिंग और रिवर फ्रंट डेवलपमेंट जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी सौंपे जाएंगे. इसके अतिरिक्त, जल संसाधन विभाग की जमीन, भवन, निरीक्षण भवन और अन्य संपत्तियों के प्रबंधन तथा रखरखाव की जिम्मेदारी भी यह निगम संभालेगा. सरकार की योजना है कि जल परियोजनाओं के साथ-साथ उनसे जुड़ी संपत्तियों का भी व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल किया जा सके.
बिहार जल संसाधन विकास निगम की अधिकृत पूंजी 50 करोड़ रुपये तय की गई है. वहीं, शुरुआती स्थापना और संचालन के लिए राज्य सरकार की ओर से 6 लाख रुपये की सदस्यता पूंजी दी जाएगी.
यह निगम केवल निर्माण कार्य कराने वाली संस्था नहीं होगा. इसके माध्यम से डीपीआर (DPR) तैयार करने, इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, निर्माण और तकनीकी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी. इन सेवाओं से मिलने वाला राजस्व भी निगम की आय का एक बड़ा जरिया बनेगा, जिससे यह भविष्य में आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा.
आधुनिक तकनीक से जल प्रबंधन
नए मॉडल में टेक्नोलॉजी को भी प्राथमिकता दी गई है. जल प्रबंधन के लिए जीआईएस (GIS), रिमोट सेंसिंग और वाटर डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा. जल संसाधनों की जानकारी को बेहतर ढंग से इकट्ठा करने और परियोजनाओं की योजना को अधिक तकनीकी आधार देने के लिए निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की मदद भी ली जाएगी.
शुरुआती दौर में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति या पदस्थापन के जरिए निगम में तैनात किया जाएगा, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ सीमित रहे. यह निगम पूरे बिहार में जल संसाधन से जुड़े कार्य करेगा और जरूरत पड़ने पर राज्य के बाहर भी परियोजनाएं लेने का प्रावधान इसमें रखा गया है. इसके संचालन की जिम्मेदारी निदेशक मंडल की होगी, जबकि रोजमर्रा के कार्यों का निष्पादन प्रबंध निदेशक करेंगे.







