बक्सा में ‘दहाड़ेगी’ बिहार की बाघिन, 2 अक्टूबर को जंगल में होगी वापसी! पढ़िए -एक नए युग की शुरुआत – आबादी और रेडियो कॉलर
Bihar Tigress Buxa: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई वयस्क बाघिन को 'ग्रीन कॉरिडोर' के जरिए बक्सा अभयारण्य पहुंचाया गया; यह पांच साल की महत्वाकांक्षी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
Bihar Tigress Buxa: पश्चिम बंगाल के अलीपुरदुआर जिले में स्थित बक्सा बाघ अभयारण्य में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। बुधवार को बिहार से एक बाघिन को यहां लाया गया है, जिसे 2 अक्टूबर को सुबह साढ़े नौ बजे जंगल में छोड़ दिया जाएगा। यह कदम बक्सा में बाघों की संख्या बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की एक बाघिन को पहली बार बिहार से दूसरे राज्य के टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया। बाघिन को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंचाया गया। रेडियो-कॉलर के बाद उसकी निगरानी की जा रही है।
पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज उरांव ने इस महत्वपूर्ण स्थानांतरण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाघिन को बिहार के वाल्मीकि बाघ अभयारण्य से विशेष रूप से बक्सा लाया गया है। फिलहाल, बक्सा में बाघों की कोई स्थायी आबादी नहीं है, हालांकि कैमरे में एक बाघ जरूर दिखा था, जिसके बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि वह भूटान या असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान से भटककर यहां आया होगा।
इस वयस्क बाघिन को विमान के जरिए हासीमारा वायुसेना अड्डे तक लाया गया था। वहां से उसे ‘ग्रीन कॉरिडोर’ यानी यातायात बाधा रहित विशेष मार्ग के माध्यम से सीधे बक्सा बाघ अभयारण्य के भीतर बने बाड़े तक पहुंचाया गया। वन मंत्री मनोज उरांव ने बक्सा बाघ अभयारण्य का दौरा कर बाघिन को जंगल में छोड़े जाने की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने वन विभाग, पुलिस और अन्य एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक भी की। उरांव ने जोर देकर कहा कि यह स्थानांतरण बक्सा में बाघों की संख्या बढ़ाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
मनोज उरांव ने कहा, ‘बाघिन को दो अक्टूबर को सुबह साढ़े नौ बजे जंगल में छोड़ा जायेगा। सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।’
रेडियो कॉलर से होगी बाघिन की हर गतिविधि पर नजर
उन्होंने बताया कि बाघिन स्वस्थ है और उस पर चौबीसों घंटे कड़ी नजर रखी जा रही है। जंगल में छोड़े जाने के बाद उसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने के लिए उसमें एक रेडियो कॉलर भी लगाया गया है। वन विभाग ने ऐसी व्यवस्था की है, जिससे बाघिन की हर हरकत पर नजर रखी जा सके और वह किसी भी कीमत पर मानव बस्तियों की ओर न जाए। बाघिन को कई दिनों के अथक प्रयासों के बाद मंगलवार शाम को बिहार के पश्चिम चंपारण जिले स्थित वाल्मीकि बाघ अभयारण्य में पकड़ा गया था। भारी बारिश के कारण इस अभियान में कई बार बाधाएं आईं, लेकिन अंततः वनकर्मियों ने बाघिन को बेहोश कर विमान से उत्तर बंगाल पहुंचाया।
पांच साल की परियोजना का अहम हिस्सा
अधिकारियों ने बताया कि यह बाघिन का स्थानांतरण बक्सा बाघ अभयारण्य में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए बनाई गई पांच वर्षीय परियोजना का एक अभिन्न हिस्सा है। इस परियोजना को वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक के लिए तैयार किया गया है, जिसके तहत चरणबद्ध तरीके से बाघों को जंगल में छोड़ा जाएगा। इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के भी शामिल होने की संभावना है, जो इस पहल के महत्व को दर्शाता है। पढ़िए विस्तार से
भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से गोरखपुर से बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंची वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की बाघिन। बिहार के इतिहास में पहली बार बाघ का अंतर्राज्यीय स्थानांतरण
बिहार के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की एक बाघिन को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से गोरखपुर हवाई अड्डे से पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंचाया गया है। संरक्षण के उद्देश्य से बिहार से किसी बाघ को पहली बार दूसरे राज्य के टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया है। यह बिहार के लिए गौरव का क्षण है और राज्य की बढ़ती संरक्षण क्षमता तथा देश के राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्रयासों में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
बाघिन को वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में सफलतापूर्वक बेहोश कर रेडियो-कॉलर लगाया गया। आवश्यक पशु चिकित्सा एवं वन्यजीव प्रबंधन प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उसे सुरक्षित रूप से गोरखपुर हवाई अड्डे तक पहुंचाया गया, जहां से भारतीय वायु सेना के विशेष विमान द्वारा बक्सा टाइगर रिजर्व ले जाया गया। बाघिन को 30 सितंबर की सुबह लगभग 8 बजे बक्सा टाइगर रिजर्व के निर्धारित सॉफ्ट-रिलीज एनक्लोजर में सुरक्षित पहुंचा दिया गया। इस प्रकार बाघिन को बेहोश किए जाने से लेकर उसके नए संरक्षण क्षेत्र में सुरक्षित पहुंचाने तक की पूरी प्रक्रिया लगभग 15 घंटे में सफलतापूर्वक पूरी हुई।
बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघिन को फिलहाल विशेष रूप से तैयार किए गए एनक्लोजर में रखा गया है। वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञ उसके स्वास्थ्य, व्यवहार एवं नए वातावरण के अनुकूलन की लगातार निगरानी कर रहे हैं। 2 अक्टूबर को उसे एनक्लोजर से बड़े वन क्षेत्र में छोड़े जाने की योजना है।
इस ऐतिहासिक अभियान को बिहार एवं पश्चिम बंगाल वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और भारतीय वायु सेना के समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। अभियान में वन्यजीव विशेषज्ञों, पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों तथा दोनों राज्यों के मैदानी वनकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाघिन के सुरक्षित पकड़ने, रेडियो-कॉलर लगाने, सड़क मार्ग से गोरखपुर तक पहुंचाने, विशेष विमान से परिवहन तथा बक्सा टाइगर रिजर्व में सुरक्षित स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित वन्यजीव प्रबंधन एवं पशु चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुरूप की गई।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बक्सा टाइगर रिजर्व तक बाघिन का यह स्थानांतरण बिहार की संरक्षण यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व देश के महत्वपूर्ण तराई वन परिदृश्य का हिस्सा है और बिहार में बाघ संरक्षण का प्रमुख केंद्र है। इस ऐतिहासिक पहल के माध्यम से बिहार ने पहली बार अपने यहां के बाघ को दूसरे राज्य के संरक्षण कार्यक्रम के लिए उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय स्तर पर बाघ संरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका को और मजबूत किया है।
यह अभियान अंतर्राज्यीय सहयोग, वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन और संस्थागत समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। बिहार से पश्चिम बंगाल तक बाघिन की यह यात्रा केवल एक वन्यजीव के स्थानांतरण की कहानी नहीं, बल्कि बिहार के बदलते संरक्षण परिदृश्य और देश के व्यापक बाघ संरक्षण प्रयासों में राज्य की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है।
बिहार के लिए यह ऐतिहासिक उपलब्धि गर्व का विषय है—वाल्मीकि टाइगर रिजर्व ने पहली बार अपने बाघ को दूसरे राज्य के बाघ संरक्षण प्रयास में योगदान के लिए भेजा है।
Bihar Flood: बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ एक स्थायी संकट है। 2020 से अब तक 5000 करोड़ से ज्यादा खर्च होने के बावजूद गांव डूब रहे हैं, तटबंध टूट रहे हैं। लाखों लोग प्रभावित
#BiharFlood,#FloodCrisis,#BiharNews
Samastipur Rail Mandal: समस्तीपुर रेल मंडल ने छठ महापर्व के लिए 13 प्रमुख स्टेशनों पर 50 लाख रुपये की लागत से अस्थायी होल्डिंग एरिया बनाने का नया प्लान तैयार किया है। इससे लाखों यात्रि
#SamastipurRail,#ChhathPuja,#BiharNews
Bhagalpur University: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय ने 58 शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। अनियमित नियुक्तियों पर हुई इस कार्रवाई से हड़कंप मचा है।
#BhagalpurUniversity,#TMBU,#BiharNews
Bhagalpur Vikramshila Setu: भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त स्पैन की मरम्मत के लिए BRO की एक्सपर्ट टीम को सिक्किम से बुलाया गया है। 15-20 दिन में नया ट्रस ब्रिज
#BhagalpurNews,#VikramshilaSetu,#BiharInfrastructure
You must be logged in to post a comment.