Bihar Rail News: उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच रेल यात्रा करने वालों का लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है। बलिया-छपरा रेलखंड पर सरयू नदी के ऊपर 14 साल से निर्माणाधीन नया रेल पुल बनकर तैयार हो चुका है। इस महत्वपूर्ण परियोजना पर लगभग 246 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, और यह 1180 मीटर लंबा पुल नवंबर 2026 के आखिर तक ट्रेनों के परिचालन के लिए तैयार हो सकता है।
इस पुल के शुरू होने से बकुलहा और मांझी के बीच चली आ रही सिंगल लाइन की बड़ी बाधा समाप्त हो जाएगी। इससे ट्रेनों की आवाजाही पहले से कहीं अधिक आसान होगी। साथ ही, क्रॉसिंग के कारण होने वाली देरी से भी यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
14 साल में बनकर तैयार हुआ सरयू पुल
सरयू नदी पर इस पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2012 में शुरू हुआ था। यह पुल बकुलहा और मांझी रेलवे स्टेशनों के बीच स्थित है। शुरुआत में इसकी लंबाई 1120 मीटर निर्धारित की गई थी और इसके लिए 19 पाए तैयार किए गए थे। हालांकि, बाद में दिल्ली से आई एक तकनीकी टीम ने निरीक्षण के दौरान कुछ खामियां पाईं। इसके बाद पुल की लंबाई 60 मीटर बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
रेलवे ने दो अतिरिक्त पाए बनाकर पुल की कुल लंबाई 1180 मीटर कर दी। इस बदलाव के कारण निर्माण लागत में करीब 40 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे पुल के निर्माण पर कुल 246 करोड़ रुपये का खर्च आया है।
पुल की सुरक्षा के लिए 50 करोड़ के गाइड बंध
सरयू नदी के तेज बहाव और कटाव से नए रेल पुल को सुरक्षित रखने के लिए रेलवे ने विशेष इंतजाम किए हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार की तरफ पुल के दोनों छोर पर गाइड बंध बनाने के लिए लगभग 50 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। दोनों तरफ 50-50 मीटर लंबे गाइड बंधों का निर्माण किया जा रहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार, इनका करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इन गाइड बंधों का मुख्य उद्देश्य नदी के बहाव से पुल के किनारों को सुरक्षित रखना है।
नवंबर 2026 तक दौड़ सकती हैं ट्रेनें, CRS की हरी झंडी का इंतजार
नए रेल पुल का निर्माण पूरा होने के बाद रेलवे अब इसके नियमित परिचालन की तैयारियों में जुटा है। हालांकि, यात्रियों को इस पुल से सफर करने के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी महेश गुप्त के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार,
मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त को निरीक्षण के लिए पत्र भेजा जा चुका है। निरीक्षण पूरा होने और आवश्यक अनुमति मिलने के बाद ही पुल पर नियमित रेल परिचालन शुरू किया जाएगा। रेलवे को उम्मीद है कि नवंबर 2026 के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। हालांकि, ट्रेनों के परिचालन की निश्चित तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।
फिलहाल औड़िहार से बकुलहा और मांझी से छपरा तक दोहरी रेल लाइन पर ट्रेनों का परिचालन हो रहा है। लेकिन बकुलहा और मांझी के बीच नए पुल के चालू नहीं होने के कारण इस हिस्से में सिंगल लाइन से ही ट्रेनों की आवाजाही होती है, जिससे ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है और यात्रियों का समय भी प्रभावित होता है। नए पुल के चालू होने से इस रेलखंड पर दोहरी लाइन के परिचालन का रास्ता साफ होगा, जिससे ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी और अनावश्यक देरी कम होगी।
यह नया रेल पुल उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच रेल संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका सीधा फायदा बलिया, छपरा और आसपास के क्षेत्रों से रेल यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को मिलेगा। साथ ही, दोहरी रेल लाइन की सुविधा मिलने से मालगाड़ियों के परिचालन में भी आसानी होगी, जिससे इस रेल मार्ग की क्षमता बढ़ेगी।







