Jale Farmers: जाले में जाले के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। कृषि विज्ञान केंद्र ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को पराली जलाने से होने वाले गंभीर नुकसानों के प्रति जागरूक किया है। इस कार्यक्रम में कुल 65 किसानों ने हिस्सा लिया, जिन्हें मिट्टी की सेहत और पर्यावरण संरक्षण के वैज्ञानिक तरीके समझाए गए।
कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा रतनपुर और ब्रह्मपुर गांव में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, फसल अवशेष जलाने के खतरों और संतुलित उर्वरक के इस्तेमाल की सटीक जानकारी देना था। केंद्र की वैज्ञानिक ई. निधि कुमारी और डॉ. पूजा कुमारी ने किसानों से सीधा संवाद किया।
वैज्ञानिकों ने जोर देकर बताया कि फसल अवशेष यानी पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। इससे न केवल मिट्टी की प्राकृतिक उपजाऊ क्षमता घटती है, बल्कि हवा में प्रदूषण भी तेजी से बढ़ता है, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है। उन्होंने किसानों को पराली से खाद बनाने, मल्चिंग जैसी आधुनिक कृषि विधियों को अपनाने और मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी।
इस अभियान में रतनपुर गांव से 37 और ब्रह्मपुर गांव से 28 किसानों सहित कुल 65 किसानों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। केंद्र ने सभी उपस्थित किसानों से अपील की कि वे ‘खेत बचाओ, मिट्टी बचाओ और पर्यावरण बचाओ’ के इस महत्वपूर्ण संदेश को अपने समुदाय के हर व्यक्ति तक पहुंचाएं, ताकि एक स्वस्थ और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित हो सके।

















