Jale Kali Puja: जाले के बसंत गांव में इस वर्ष काली पूजा का 50वां वर्ष स्वर्ण जयंती समारोह के रूप में मनाया जा रहा है। इस भव्य आयोजन को लेकर कतरौल-बसंत पंचायत के गांव एवं आसपास के क्षेत्रों में तैयारियां जोरों पर हैं। पचास साल पूरे होने पर यह पूजा इस बार न सिर्फ बड़ी धूमधाम से मनाई जाएगी, बल्कि कई विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी इसका हिस्सा होंगे।

पुरानी पूजा समिति को भंग कर इस बार एक नई कमेटी का गठन किया गया है, जो पूरे आयोजन की जिम्मेदारी संभालेगी। पशुपति मिश्रा को अध्यक्ष, राहुल कुमार झा को उपाध्यक्ष, इंद्रजीत झा को सचिव और रमन कुमार झा को कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
सोनू झा उपसचिव की भूमिका में होंगे। इसके अलावा, ध्रुव कुमार झा और सोनू कुमार झा को उपकोषाध्यक्ष, मुकेश झा को मंडप प्रभारी, दिलीप मिश्रा को उप मंडप प्रभारी, अवधेश झा को मेला प्रभारी, किशन कुमार झा को उप मेला प्रभारी नियुक्त किया गया है। नंदेश्वर झा मनोरंजन प्रभारी, राकेश झा उप मनोरंजन प्रभारी, दुर्गेश झा पूजा प्रभारी और महाचंद्र झा को स्वागताध्यक्ष चुना गया है।
भव्य आयोजनों से सजेगी जाले की काली पूजा
कार्यक्रमों की शुरुआत 8 नवंबर 2026 को काली स्थान से कलश यात्रा के साथ होगी। यह यात्रा पूरे गांव का भ्रमण करेगी और इसमें महाकाल की झांकी आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगी। सांस्कृतिक संध्याओं में 10 नवंबर को हेलो मिथिला, जनकपुर धाम (नेपाल) की टीम अपनी प्रस्तुति देगी। 11 नवंबर को विकास झा अपनी टीम के साथ और 12 नवंबर को जूली झा अपनी टीम के साथ मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगी।
झिझिया नृत्य के साथ मां काली का विसर्जन
आयोजन का समापन 13 नवंबर 2026 को मां काली के विसर्जन के साथ होगा। विसर्जन शोभायात्रा शाम चार बजे से झिझिया नृत्य के साथ शुरू होगी, जो इस साल के समारोह को और भी यादगार बनाएगी। पचासवें वर्ष की यह काली पूजा बसंत गांव के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, जिसमें पूरा समुदाय उत्साह के साथ जुटा हुआ है।







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