Bihar Self Employment: बिहार के जाले स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक नया रास्ता खुला है। चार दिवसीय मोमबत्ती निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन के बाद कुल 26 युवक-युवतियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में कम पूंजी के साथ अपना व्यवसाय शुरू करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की उम्मीद जगी है, जो बिहार में स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

केंद्र के अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने इस अवसर पर बताया कि मोमबत्ती बनाने का व्यवसाय बेहद कम पूंजी और सीमित संसाधनों से शुरू किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए आय बढ़ाने का एक प्रभावी तरीका है। डॉ. शेखर के अनुसार, यह उद्योग न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करने में सहायक सिद्ध होगा।
कम पूंजी में बड़ा मुनाफा: मोमबत्ती उद्योग से बदल सकती है तस्वीर
प्रशिक्षण कार्यक्रम की संचालिका डॉ. पूजा कुमारी ने प्रतिभागियों को मोमबत्ती निर्माण के हर पहलू की विस्तृत जानकारी दी। इसमें कच्चे माल, विभिन्न प्रकार के मोम, बत्ती, रंग और सुगंध के साथ-साथ अलग-अलग सांचों का उपयोग शामिल था। प्रतिभागियों को मोम पिघलाने, रंग और सुगंध मिलाने तथा विभिन्न आकार और डिजाइन की मोमबत्तियां तैयार करने का व्यावहारिक अनुभव भी दिया गया। इसके अतिरिक्त, उन्हें सजावटी दीये बनाने की तकनीक भी सिखाई गई, जिससे उनके उत्पादों में विविधता आ सके।
डॉ. दिव्यांशु शेखर ने कहा, “मोमबत्ती निर्माण कम पूंजी और सीमित संसाधनों में शुरू किया जा सकने वाला व्यवसाय है। यह उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में सहायक हो सकता है।”
बाजार की मांग और बिक्री के अवसर: कहां बेचें अपने उत्पाद?
डॉ. पूजा कुमारी ने बताया कि वर्तमान बाजार में सामान्य मोमबत्तियों के अलावा सजावटी, सुगंधित और डिजाइनर मोमबत्तियों की भारी मांग है। दीपावली, छठ, दुर्गा पूजा, विवाह समारोह और अन्य आयोजनों में इन उत्पादों की बिक्री की अपार संभावनाएं हैं। प्रशिक्षित युवक-युवतियां अब अपने घर से ही उत्पादन शुरू कर सकते हैं और स्थानीय बाजारों, दुकानों, मेलों, प्रदर्शनियों के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यमों से भी अपने उत्पादों को बेचकर अच्छी कमाई कर सकते हैं।
उन्होंने गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और उचित मूल्य निर्धारण के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जो इस व्यवसाय को छोटे स्तर से बड़े पैमाने पर ले जाने में मदद करेगा। इस पहल से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनेंगी और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करने में सक्षम होंगी।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक ई. निधि कुमारी, प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ. चंदन कुमार के साथ-साथ केंद्र के कर्मी अमितेश कुमार गौरव, अमरंजय कुमार, मनीष कुमार, अभय कुमार और अमन कुमार भी उपस्थित रहे। यह प्रशिक्षण ग्रामीण क्षेत्रों में आय सृजन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जिससे कई परिवारों के जीवन में बदलाव आने की उम्मीद है।







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