सहरसा। प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी सावन महीने के प्रवेश होते ही मिथिला से जुड़ी संस्कृति का महापर्व मधुश्रावणी शुरू होते ही जिले के विभिन्न गांवों में पारंपरिक लोकगीत,नचारी एवं धार्मिक गीत गूजने लगी है ।
इस महापर्व में नवविवाहिता द्वारा अपने पति की दीर्घायु और घर में सुख शांति के लिए लगातार 15 दिनों तक बिना नमक ग्रहण किए कठिन साधना कर बासी पुष्प ,बेलपत्र, अकवन के फूल आदि से नागदेवता, हाथी बनाकर उस पर दूध लावा से पूजा अर्चना करती है। इस बार यह पर्व 28 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगा। नवविवाहिता को पति की दीर्घायु होने की कामना के लिए टेमी जलाकर पैर के ठेहुना पर दागा जाता है।इसके बाद पर्व का समापन होता है।






सावन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से शुक्ल पक्ष तृतीया तक मनाया जाता है। इसमें प्रत्येक दिन पारंपरिक लोकगीत, शिव पार्वती, विषहरी के भक्ति गीत महिलाओं द्वारा महिलाओं द्वारा गायी जाती है।
पूजा की खास विशेषता यह है कि इसमें पुरोहित से लेकर यजमान तक महिला होती है।जो कथा सुनती व सुनाती है। पूजा खत्म होने के बाद नवविवाहिता को उसके भाई हाथ पकड़कर उठाते हैं।
फलस्वरूप बहन भाई को प्रसाद देती है। नवविवाहिता रश्मि झा,पूजा झा एवं कंचन कुमारी ने बताया कि यह पर्व बहुत ही उल्लास से अपने पति की दीर्घायु और परिवार के सुख शांति के लिए मना रहे है।यह पर्व परम्परा पूर्वज से ही चली आ रही है। जिसका निर्वहन पूरी नियम निष्ठा से की जा रही है।








