Bihar Politics: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को उनकी जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से तेजस्वी यादव ने वीपी सिंह के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह पूर्व प्रधानमंत्री की गोद में खेले हैं और उनके परिवार का वीपी सिंह के प्रति गहरा व्यक्तिगत लगाव रहा है।
‘गोद में खेला हूं’ – तेजस्वी का वीपी सिंह से व्यक्तिगत जुड़ाव
तेजस्वी यादव ने अपने संदेश में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के साथ अपने बचपन की स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने लिखा कि उनका वीपी सिंह से व्यक्तिगत जुड़ाव रहा है और उनके परिवार के सदस्य उनके प्रति कृतज्ञ हैं। गौरतलब है कि तेजस्वी यादव का जन्म 9 नवंबर 1989 को हुआ था, जिसके कुछ सप्ताह बाद 2 दिसंबर 1989 को वीपी सिंह देश के प्रधानमंत्री बने थे।






उस दौर में बिहार की राजनीति में भी वीपी सिंह की सक्रिय भूमिका रही थी। जनमोर्चा के गठन के समय से ही उनका बिहार से राजनीतिक संपर्क बना हुआ था। वीपी सिंह जब पटना आते थे, तब वह लालू प्रसाद यादव के आवास पर भी जाते थे, जो उस समय बिहार में विपक्ष के नेता थे। इसी राजनीतिक रिश्ते और पारिवारिक परिचय के कारण तेजस्वी यादव ने अपने संदेश में वीपी सिंह से जुड़ी बचपन की यादों का जिक्र किया है।
मंडल कमीशन: सामाजिक बराबरी की दिशा में ऐतिहासिक कदम
तेजस्वी यादव ने वीपी सिंह के मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने के फैसले को सामाजिक बराबरी की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि वीपी सिंह ने लंबे समय से वंचित, उपेक्षित और पिछड़े वर्गों की लड़ाई को एक नई दिशा दी थी। आरजेडी नेता के अनुसार, मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मंजूरी देकर वीपी सिंह ने देश के पिछड़े वर्गों के लिए सामाजिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया।
तेजस्वी ने वीपी सिंह को ओबीसी समुदाय का सच्चा पैरोकार और हाशिये पर रहे समूहों का नायक बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वीपी सिंह के इस फैसले ने सामाजिक न्याय की बहस को पूरे देश में केंद्र में ला दिया था। उनके मुताबिक, मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह सामाजिक संरचना में बराबरी की मांग को स्वीकार करने का एक महत्वपूर्ण कदम था।
देशहित और लोकहित में विकास की वकालत
तेजस्वी यादव ने अपने संदेश में एक महत्वपूर्ण बात कही कि किसी वर्ग के उत्थान के लिए उसी वर्ग से होना जरूरी नहीं है। उनके अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि समाज में श्रेष्ठता के भ्रम से ऊपर उठकर देशहित और लोकहित में सभी वर्गों के विकास को समझा जाए और उसके लिए कार्य किया जाए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के छोटे कार्यकाल को भी देश की दशा और दिशा बदलने वाला बताया।
वी पी सिंह ने सामाजिक बराबरी की मांग को स्वीकार करने का कदम उठाया, जो सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि सामाजिक संरचना में बदलाव की शुरुआत थी।
पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह का नाम भारतीय राजनीति में मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने के फैसले के कारण प्रमुखता से लिया जाता है। उनके इस फैसले ने पिछड़े वर्गों के आरक्षण और सामाजिक प्रतिनिधित्व की राजनीति को एक नई पहचान दी, जिसकी गूंज आज भी भारतीय राजनीति में सुनाई देती है।








