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दरभंगा के बेनीपुर में जनप्रतिनिधियों के लेटर पैड का धड़ल्ले से दुरुपयोग…महिला जनप्रतिनिधि बोली-मुझे तो नहीं पता है वही (पति) बताएंगे

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बेनीपुर, देशज टाइम्स ब्यूरो। त्रिस्तरीय पंचायत समिति के नवनिर्वाचित एवं निवर्तमान जनप्रतिनिधियों के लेटर पैड का दुरुपयोग धड़ल्ले से जारी है। हालात यह है कि  बेनीपुर में जनप्रतिनिधियों के लेटर पैड का धड़ल्ले से दुरुपयोग ही नहीं हो रहा, मौजूदा और पूर्ववर्ती जनप्रतिनिधियों को मालूम तक नहीं आखिर उनके लेटर पैड पर किस बात की डिमांड प्रशासन से की गई। क्या मामला था, क्या लिखा गया। हालात यह हैं इस त्रिस्तरीय पंचायत समिति सदस्यों का एक बानगी देखिए… महिला जनप्रतिनिधि बोली-मुझे तो नहीं पता है वही (पति) बताएंगे। पढ़िए सतीश चंद्र झा की रिपोर्ट

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प्रखंड, अनुमंडल से लेकर जिला तक के शायद ही कोई ऐसे पदाधिकारी होंगे जिनके टेबल पर ऐसे जनप्रतिनिधियों के 2-4 लेटर पैड पर जांच, शिकायत एवं मांग से संबंधित ज्ञापन न मौजूद हो।

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जानकारी के अनुसार, वर्तमान सरकार के कार्यकाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आधी आबादी यानी महिलाओं को आरक्षण दिया गया। इसके तहत निवर्तमान एवं वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों में आधी आबादी महिला मौजूद है लेकिन वह नाम के लिए ही है। न तो किसी बैठक में उनकी भूमिका या मौजूदगी अनुकूल दिखाई देती है और ना ही विकास या कल्याणकारी योजनाओं की समाधान के लिए कोई तत्परता ही दिखाई पड़ती है।

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अधिकांश स्थानों पर महिला जनप्रतिनिधियों के एवज में उनके पति एवं पुत्र सहित अन्य परिजन का ही बोल वाला देखने को मिल रही है। इसी क्रम में उच्च पदाधिकारियों के यहां विकास एवं कल्याण की योजनाओं के साथ-साथ शिकायत जांच एवं मांग से संबंधित लेटर पैड देखने को मिला।

और उस पर अंकित दूरभाष संख्या से जब इसकी जानकारी लेने की प्रयास की गई तो अधिकांश दूरभाष संख्या पर महिला जनप्रतिनिधियों के परिजन ही फोन उठाएं और व्याप्त समस्याओं की व्याख्यान करते हुए इसे बिहार के नंबर वन देशज टाइम्स में भी प्रमुखता से स्थान देने की मांग करने लगे।

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वहीं, कई जनप्रतिनिधि फोन उठाने पर बोली कि मुझे तो नहीं पता है वही (पति) बताएंगे की क्या मांग किनसे किए हैं।कुल मिलाकर सरकार की ओर से दिए गए आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य धरातल पर विफल साबित होती दिख रही है।

क्योंकि सामान्य कार्यक्रम से लेकर बहुउद्देशीय कार्यक्रम तक में भी महिला जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति नगण्य ही रहती है या तो उनके परिजन उस बैठक में भाग लेते हैं या फिर वस्तु स्थिति की जानकारी रखकर पत्राचार के माध्यम से ही महिला प्रतिनिधियों के दायित्वों का निर्वहन किया जा रहा है।

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