Darbhanga News: दरभंगा जिले के जाले प्रखंड में किसान धान रोपनी की तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन बिजली आपूर्ति उनकी सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। मंगलवार को हल्की बारिश और बूंदाबांदी से मौसम सुहावना हुआ, फिर भी पर्याप्त वर्षा न होने के कारण किसान निजी नलकूपों के सहारे खेतों में पानी भरकर कदवा तैयार कर रहे हैं। समय पर धान की रोपनी शुरू करने की जद्दोजहद में जुटे अन्नदाताओं को लगातार बिजली कटौती से जूझना पड़ रहा है, जिससे उनकी मेहनत पर पानी फिरने का डर है।
रोपनी की तैयारी तेज, फिर भी चिंता बरकरार
प्रखंड क्षेत्र में कई किसान इन दिनों अपने खेतों की सिंचाई करवा रहे हैं। जाले के प्रगतिशील किसान प्रेम कुमार धीर, जोगियारा के भोला प्रसाद सिंह और रतनपुर के धर्मेंद्र ठाकुर, राज सिंघानिया, विजय दास तथा राजा सहनी जैसे कई किसान अपने जुताई किए गए खेतों में पानी भर रहे हैं। कुछ किसान धान की नर्सरी में यूरिया का छिड़काव करते भी दिखे, ताकि पौधे तेजी से बढ़ें और समय पर रोपनी हो सके। किसानों का कहना है कि आसपास के खेतों में अगले दो-तीन दिनों में रोपनी शुरू होने की उम्मीद है।






“नर्सरी का पौधा अभी छोटा है। यूरिया देने से पौध तेजी से बढ़ेगा और समय पर रोपनी संभव हो सकेगी,” किसानों ने बताया।
उन्होंने यह भी जोड़ा, “आसपास के खेतों में दो-तीन दिनों के भीतर रोपनी शुरू होने की संभावना है। ऐसे में यदि उनकी नर्सरी तैयार नहीं हुई तो खेतों तक ट्रैक्टर पहुंचने का रास्ता बंद हो जाएगा, जिससे खेती प्रभावित हो सकती है।”
मजदूरों का संकट और बिजली की आंख-मिचौली
किसानों की परेशानी सिर्फ पानी तक सीमित नहीं है। अधिकांश पुरुष मजदूर धान रोपनी के लिए पंजाब चले गए हैं, जिससे गांवों में सिर्फ महिला, वृद्ध और सीमित संख्या में मजदूर ही उपलब्ध हैं। इन्हीं के भरोसे खेती का काम चल रहा है।
“क्षेत्र के अधिकांश पुरुष मजदूर धान रोपनी के लिए पंजाब चले गए हैं। गांवों में फिलहाल केवल महिला, वृद्ध एवं सीमित संख्या में मजदूर उपलब्ध हैं, जिनके भरोसे ही खेती का कार्य चल रहा है,” किसानों ने अपनी समस्या बताई।
इस बीच, बिजली संकट ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। रतनपुर के किसान राम सागर झा, राज सिंघानिया, कन्हैया झा, कन्हैया चौपाल और राजा सहनी ने बताया कि 29 जून की देर शाम से बिजली आपूर्ति में कुछ सुधार हुआ था, जिससे सिंचाई का काम चल पा रहा था।
हल्की हवा में भी गुल हो रही बिजली, किसान परेशान
मंगलवार को सुबह करीब 10:30 बजे बारिश शुरू होते ही बिजली आपूर्ति फिर बाधित हो गई, जो बारिश खत्म होने के लगभग दो घंटे बाद दोपहर 2:30 बजे बहाल हुई। किसानों का आरोप है कि हल्के बादल या हवा चलने पर भी बिजली काट दी जाती है, जो अनुचित है।
“हल्के बादल या हवा चलते ही बिजली काट देना उचित नहीं है। तेज बारिश के दौरान सुरक्षा कारणों से आपूर्ति बाधित होना समझ में आता है, लेकिन सामान्य मौसम में बार-बार बिजली कटौती से धान रोपनी की तैयारियां प्रभावित होती हैं,” किसानों ने अपनी व्यथा बताई।
बिजली बहाल होते ही किसान तुरंत खेतों की ओर सिंचाई के लिए निकल पड़े, क्योंकि हर पल उनके लिए महत्वपूर्ण है।
दरभंगा के किसानों की यह चिंता सिर्फ जाले प्रखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे बिहार में धान की खेती करने वाले किसानों की साझा समस्या है। समय पर और पर्याप्त बिजली आपूर्ति के बिना, किसानों के लिए समय पर धान की रोपनी करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार और बिजली विभाग को इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान देना चाहिए, ताकि अन्नदाताओं को राहत मिल सके और बिहार की कृषि व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।








