Saran Hit and Run: बिहार के सारण जिले में हिट एंड रन सड़क हादसे एक गंभीर समस्या बन चुके हैं। पिछले चार वर्षों के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि इन दुर्घटनाओं में 1259 लोगों की मौत हुई है। चिंताजनक बात यह है कि इन मामलों में न तो अधिकांश आरोपी वाहन और चालक पकड़े गए हैं, और न ही 688 पीड़ितों या उनके परिजनों का अब तक पता लगाया जा सका है, जिससे उन्हें सरकारी सहायता भी नहीं मिल पाई है।
सड़क हादसों का खौफनाक मंजर: हर साल बढ़ रही मौतें
इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (eDAR) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल 2022 से 27 मई 2026 तक सारण जिले में कुल 2494 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 1500 से अधिक लोगों की जान चली गई, जिनमें से 1259 मौतें अकेले हिट एंड रन मामलों में हुईं। यह आंकड़ा सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रभात खबर की एक पड़ताल से सामने आया है कि इन मौतों के अधिकांश मामलों में आरोपी वाहन और चालक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। कई मामलों में तो जांच को बंद कर दिया गया है या अंतिम रिपोर्ट लगाने की प्रक्रिया चल रही है।






मुआवजे का इंतजार और लापता पीड़ित
प्रशासन और परिवहन विभाग की पहल के बाद, हिट एंड रन मामलों में मुआवजे के लिए 571 पीड़ित परिवारों ने आवेदन किया। इनमें से 463 मामलों में मुआवजे का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अभी भी 688 पीड़ितों या उनके परिजनों का कोई पता नहीं चल पाया है। इस वजह से ये परिवार सरकारी सहायता से वंचित हैं। परिवहन विभाग ने जिले के सभी संबंधित थानों को निर्देश दिया है कि इन अज्ञात पीड़ितों और उनके आश्रितों का पता लगाया जाए ताकि उन्हें भी आर्थिक सहायता मिल सके।
आरोपी क्यों नहीं पकड़े जा रहे? विशेषज्ञ दे रहे सुझाव
जानकारों और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिट एंड रन के आरोपियों के न पकड़े जाने के कई कारण हैं। इनमें बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों का इस्तेमाल, राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर पर्याप्त ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर (ANPR) कैमरों की कमी, सीमित सीसीटीवी नेटवर्क, हाईवे पेट्रोलिंग का अभाव और कई मामलों में जांच की धीमी गति शामिल है।
सारण जिला परिवहन पदाधिकारी लातीफुर रहमान ने बताया, ‘जितने भी आवेदन आए उनमें से 89 फ़ीसदी पर कार्रवाई कर दी गई है और मुआवजा का भुगतान करवा दिया गया है। इस तरह की घटनाओं को रोकने और आरोपियों के धर पकड़ के लिए कई तकनीक अपनाए जा रहे हैं, जल्द ही सामने देखने को मिलेगा।’
विशेषज्ञों ने इन घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में आधुनिक नंबर प्लेट रीडर कैमरे लगाने, हाईवे पर नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाने और एक अलग हाईवे पुलिस व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि कैमरों के साथ-साथ घटनास्थल पर फॉरेंसिक जांच, टायरों के निशानों का विश्लेषण और मजबूत पुलिस नेटवर्क के जरिए भी आरोपियों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। इन उपायों को लागू करने से ही सारण में सड़क हादसों पर लगाम लग सकती है और पीड़ितों को न्याय मिल पाएगा।








