Bihar Electricity Demand: विकास की रफ्तार के साथ-साथ बिहार में बिजली की खपत ने अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। राज्य में पहली बार पीक आवर के दौरान बिजली की मांग 9,000 मेगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है। इस भारी मांग के बीच, पटना स्थित बिजली कंपनी मुख्यालय में रविवार को राष्ट्रीय विद्युत सुरक्षा सप्ताह का शुभारंभ किया गया।
बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी के सीएमडी अजय यादव ने बढ़ते लोड को देखते हुए बिजली आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने सभी इंजीनियरों और फील्ड स्टाफ को तकनीकी फॉल्ट से बचने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य में लगातार बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और भीषण गर्मी के कारण बिजली की यह नई चुनौती सामने आई है, जिससे निपटने के लिए अब नई रणनीति तैयार की जा रही है।






ढाई करोड़ उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा का बड़ा प्लान
राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है। वर्तमान में बिहार में लगभग 2.20 करोड़ पंजीकृत बिजली उपभोक्ता हैं। इतनी बड़ी आबादी तक बिना किसी बाधा के बिजली पहुंचाना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस चुनौती का सामना करने के लिए बिजली कंपनी ने अब तकनीकी सुधारों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। उपभोक्ताओं को लगातार बिजली देने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
शॉर्ट सर्किट रोकने के लिए कड़े निर्देश और जागरूकता अभियान
मुख्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में “आज की जागरूकता, कल की सुरक्षा” थीम के तहत एक नए अभियान का आगाज किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आम लोगों और बिजली कर्मियों को हादसों से बचाना है। कार्यक्रम में स्पष्ट किया गया कि बढ़ती मांग के बीच सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सीएमडी अजय यादव ने विभाग के आला अधिकारियों के साथ बैठक में सुरक्षा नियमों पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उन्होंने कहा कि मैदानी स्तर पर काम करने वाले इंजीनियरों, तकनीशियनों और लाइनमैन को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का सख्ती से पालन करना होगा। अक्सर देखा जाता है कि मामूली लापरवाही के कारण बड़े हादसे हो जाते हैं।
विद्युत शॉर्ट सर्किट से होने वाली अग्नि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विभाग अब बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान शुरू कर रहा है। इसके तहत ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोगों को बताया जाएगा कि वे अपने घरों और दुकानों में वायरिंग को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई गाथा
इस कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में बिहार की हालिया उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला गया। एक समय था जब बिहार में बिजली की मांग बेहद कम होती थी और आपूर्ति भी नाममात्र की थी। आज 9,000 मेगावाट से अधिक की बिहार बिजली की मांग यह दर्शाती है कि राज्य में उद्योगों और घरेलू स्तर पर बिजली की पहुंच कितनी व्यापक हो चुकी है। बिजली कर्मियों और उपभोक्ताओं दोनों से अपील की गई है कि वे सुरक्षा नियमों के प्रति हमेशा सतर्क रहें ताकि इस बढ़ती हुई ऊर्जा का उपयोग सुरक्षित तरीके से किया जा सके और भविष्य में भी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।








