Bihar Makhana Cultivation: मिथिलांचल और सीमांचल की पहचान ‘सफेद सोना’ अब छपरा के किसानों की चमकाएगी किस्मत! गेहूं धान के साथ लहलहाएगी मखाना और पान की पैदावार। इसके लिए कृषि विभाग सारण के किसानों को मखाना की खेती का प्रशिक्षण देने की योजना बना रहा है। प्रगतिशील किसान अजीत भारती के प्रयास का ही असर है कि जिले के कृषि पदाधिकारी मधुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया, अब छपरा के किसान भी मखाना को अपना आर्थिक आधार बनाएंगे। इसके लिए विभागीय पहल अब तेज कर दी गई है।
बिहार के सारण जिले के किसानों के लिए अब समृद्धि का नया द्वार खुल गया है। मिथिलांचल और सीमांचल की पहचान बन चुका मखाना, जिसे ‘सफेद सोना’ भी कहा जाता है, अब सारण के खेतों में भी लहलहाने की तैयारी में है। गेहूं और धान की परंपरागत खेती के लिए प्रसिद्ध इस जिले में मखाना की शुरुआत से कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा हुई हैं। यह कदम किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।






जलालपुर प्रखंड के एक प्रगतिशील किसान अजीत भारती ने सबसे पहले सारण में मखाना की खेती शुरू की है। उनकी यह पहल जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है, जो अब तक केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे। बिहार सरकार के प्रयासों से मखाना को वैश्विक पहचान मिली है, जिसके बाद छपरा के किसानों ने भी इसकी खेती करने का फैसला किया है।
सारण में मखाना की नई शुरुआत: गेहूं-धान से आगे की सोच
मखाना की खेती मुख्य रूप से सुपौल, मधुबनी, सीतामढ़ी, किशनगंज और अररिया जैसे जिलों में होती रही है। अब सारण भी इस सूची में शामिल होने जा रहा है। जिले के कृषि पदाधिकारी मधुरेंद्र कुमार सिंह ने इस विकास पर खुशी व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार की मदद से मखाना को मिली वैश्विक पहचान के बाद अब छपरा के किसानों ने भी इसकी खेती करने का निर्णय लिया है। यह कदम जिले की कृषि विविधता को बढ़ाएगा और किसानों को बेहतर आर्थिक अवसर प्रदान करेगा।
किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण, दोगुनी होगी आय
कृषि विभाग सारण के किसानों को मखाना की खेती का प्रशिक्षण देने की योजना बना रहा है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से किसान आधुनिक तकनीकों और उन्नत विधियों को सीखकर मखाना का अधिक उत्पादन कर सकेंगे। मधुरेंद्र कुमार सिंह ने जोर देकर कहा कि इस नई पहल से किसानों की आय दोगुनी होगी। यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधारेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में नवाचार को भी बढ़ावा देगा।
कृषि विविधीकरण से बदलेगी तस्वीर
मखाना के अलावा, सारण जिले में पान की खेती, मौसमी फूलों जैसे गेंदा और मशरूम की खेती को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यह कृषि विविधीकरण की रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य किसानों को केवल कुछ गिनी-चुनी फसलों पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न विकल्पों के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने में मदद करना है। यह समग्र दृष्टिकोण जिले की कृषि तस्वीर को बदलने और किसानों को अधिक सशक्त बनाने में सहायक होगा।
इफको के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने पूर्णिया में कहा –
गुजरात सरकार के पूर्व मंत्री एवं भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने पूर्णिया में कहा – बिहार में बड़े पैमाने पर मखाना का उत्पादन होता है। मखाना किसानों और इससे जुड़े कारोबारियों को अधिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने बिहार में मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा की है।
मखाना अब वैश्विक उत्पाद बन चुका है तथा पूर्णिया और सीमांचल में उत्पादित उन्नत गुणवत्ता वाले मखाना की देश-विदेश में तेजी से मांग बढ़ रही है।
मखाना के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर चर्चा चल रही है। किसानों को उनकी उपज का उचित एवं लाभकारी मूल्य दिलाने की दिशा में विचार-विमर्श किया जा रहा है।सीमांचल में मखाना बोर्ड का कार्यालय अथवा क्षेत्रीय व्यवस्था स्थापित करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह इस विषय को केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के समक्ष रखेंगे।








