Bihar Politics: 25 जुलाई को पटना में छात्र आंदोलन और बिहार बंद के दौरान जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार किया गया था। अब इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता रोहिणी आचार्य ने रविवार को बिहार की सम्राट चौधरी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि छात्रों और युवाओं के आंदोलन को समर्थन देने के कारण ही तेज प्रताप यादव को पुलिस ने गिरफ्तार किया। उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया।
छात्र आंदोलन के समर्थन पर गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, तेज प्रताप यादव पर प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी से जुड़े मामले में कार्रवाई की गई है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। रोहिणी आचार्य ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सीधा सवाल किया। उन्होंने पूछा कि क्या शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे छात्रों और युवाओं के आंदोलन का समर्थन करना कोई अपराध है? उन्होंने तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी को सरकार की ‘तानाशाही’ बताया, जिससे बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है।






रोहिणी आचार्य ने सवाल किया, “क्या छात्रों और युवाओं के आंदोलन का समर्थन करना अपराध है? यह तानाशाही नहीं तो और क्या है?”
‘राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई’
राजद नेता रोहिणी का स्पष्ट कहना है कि छात्रों, युवाओं और आम लोगों की समस्याओं को लेकर अपनी आवाज उठाना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। रोहिणी ने आरोप लगाया कि तेज प्रताप यादव के खिलाफ की गई यह कार्रवाई पूर्ण रूप से राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। उनके मुताबिक, किसी विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में इस तरह की गिरफ्तारी सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष को दबाने की एक सोची-समझी कोशिश है।
पुलिस कार्रवाई और कानून-व्यवस्था पर सवाल
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी का पूरा मामला 25 जुलाई को पटना में हुए प्रदर्शन से संबंधित है। वह NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान उन्हें पहले हिरासत में लिया गया और बाद में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा और आगजनी से उनका सीधा संबंध था। रोहिणी आचार्य ने पुलिस कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन और पुलिस बल का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को डराने-धमकाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार पर जन आंदोलनों को कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया। हालांकि, पुलिस की ओर से तेज प्रताप यादव के खिलाफ लगाए गए आरोपों का आधार प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा और तोड़फोड़ से जुड़ा बताया गया है। इस मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी भी जारी है। रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में बिहार की राजनीति और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि विरोध की आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई और सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ लगे आरोपों को लेकर अलग-अलग मानदंड क्यों हैं। पढ़िए रोहिणी आचार्य ने क्या लिखा
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी सम्राट सरकार की तानाशाही ..
बिहार के मुख्यमंत्री से पूछता है बिहार.. क्या शिक्षा – व्यवस्था को सुधारने की मांग के साथ जारी छात्रों – युवाओं के आंदोलन , प्रदर्शन को समर्थन देना अपराध है ?
सम्राट सरकार की पुलिस के द्वारा तथ्यहीन व् झूठे आरोपों में तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार किया जाना साफ़ तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है l छात्रो , युवाओं व् जनता की समस्याओं के लिए आवाज उठाना हर भारतीय नागरिक का मौलिक अधिकार एवं दायित्व है और अपने इसे अधिकार एवं दायित्व का निर्वहन करने की ऐवज में बदले की भावना से गिरफ़्तारी की गयी है तेज प्रताप यादव की l
विरोध प्रदर्शन के लिए गिरफ्तार किया जाना स्पष्ट तौर पर सरकार के खिलाफ उभरे असंतोष को दबाने की दमनात्मक तानाशाही कार्रवाई का हिस्सा है और सम्राट सरकार प्रशासन एवं पुलिस बल का दुरूपयोग कर राजनीतिक विरोधियों को डराने और जन आंदोलनों के प्रभाव को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
ये कैसा न्याय है .. ये कैसा चलन है .. ये कैसी रीत है .. जिसमें सात खून का आरोपी मुख्यमंत्री बन जाता है और देश के युवा भविष्य के लिए आवाज उठानेवाले , संघर्ष करने वाले बेगुनाह को झूठे आरोपों








