Madhubani Sukhet Model: बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर प्रखंड में स्थित सुखेत ग्राम पंचायत ने ग्रामीण विकास, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा है। यह गांव अब अपने ‘सुखेत मॉडल’ के लिए न सिर्फ स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे देश में एक प्रेरणास्रोत बन चुका है। इसकी प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भी की है, जो इसकी सफलता को रेखांकित करता है।
इस अनूठी पहल की शुरुआत मछडी गांव के एक दूरदर्शी किसान सुनील कुमार ने की थी। मूल रूप से पशुपालन पर आधारित सुखेत पंचायत में पहले गलियों और खुले स्थानों पर अक्सर गोबर बिखरा रहता था। इस गंदगी के कारण न केवल दुर्गंध फैलती थी, बल्कि बीमारियां भी पनपती थीं, जिससे गांव का जनजीवन प्रभावित होता था।






मधुबनी के इस गांव ने कर दिया कमाल! PM मोदी भी हुए मुरीद, जानिए कैसे ‘कचरा’ बना ‘कमाई’ का जरिया
Bihar Sukhet Model: बिहार के मधुबनी जिले में स्थित सुखेत ग्राम पंचायत ने ग्रामीण विकास और स्वच्छता के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा है। झंझारपुर प्रखंड के इस गांव ने ‘सुखेत मॉडल’ के जरिए कचरा प्रबंधन में ऐसा कमाल किया है कि आज यह पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। इस अनूठी पहल की तारीफ स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भी की है, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ गई है।
इस अभिनव मॉडल की नींव मछडी गांव के एक दूरदर्शी किसान सुनील कुमार ने रखी थी। सुखेत पंचायत मूल रूप से पशुपालन पर आधारित है, जिसके कारण पहले गलियों और खुले स्थानों पर अक्सर गोबर बिखरा रहता था। यह न केवल गंदगी और दुर्गंध फैलाता था, बल्कि बीमारियों के पनपने का भी एक बड़ा कारण बनता था। इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए सुनील कुमार ने एक विस्तृत योजना बनाई।
कचरा बना कमाई का जरिया, गांव हुआ स्वच्छ
सुनील कुमार द्वारा तैयार की गई योजना के तहत, गांव के लगभग 50 से 60 परिवारों को इस पहल से जोड़ा गया। प्रतिदिन दो बार विशेष ठेलों के माध्यम से इन घरों से गोबर और रसोई का कचरा एकत्रित किया जाने लगा। हर दिन औसतन 20 से 30 किलोग्राम कचरा जमा होता था। इस व्यवस्था से गांव में जहां-तहां बिखरे कचरे की समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई और साफ-सफाई का स्तर काफी ऊंचा हो गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस सुखेत मॉडल की प्रशंसा की है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
सुखेत मॉडल ने स्थानीय स्तर पर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय सुधार किया है। कचरे का सही प्रबंधन करके इसे कमाई के एक महत्वपूर्ण स्रोत में बदलना, इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत है। यह दर्शाता है कि कैसे ग्रामीण स्तर पर भी नवाचार और सामूहिक प्रयास से बड़ी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। इस मॉडल को राष्ट्रीय पहचान मिलना बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और अन्य पंचायतों को भी ऐसी पहल करने के लिए प्रेरित करेगा।
कचरा प्रबंधन से बदली गांव की सूरत
इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए किसान सुनील कुमार ने एक अभिनव मॉडल की रूपरेखा तैयार की। उनकी योजना के तहत, गांव के लगभग 50 से 60 परिवारों को इस पहल से जोड़ा गया। प्रतिदिन दो बार ठेलों के माध्यम से इन घरों से 20 से 30 किलोग्राम गोबर और रसोई का कचरा एकत्रित किया जाने लगा। इस व्यवस्थित कचरा संग्रह प्रणाली ने गांव में जहां-तहां बिखरे कचरे की समस्या को पूरी तरह समाप्त कर दिया, जिससे साफ-सफाई का स्तर काफी ऊंचा हो गया।
‘सुखेत मॉडल’ बना राष्ट्रीय उदाहरण
इस ‘मधुबनी सुखेत मॉडल’ ने दिखाया है कि कैसे स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके स्वच्छता और आर्थिक समृद्धि दोनों हासिल की जा सकती हैं। कचरा अब सिर्फ एक गंदगी नहीं, बल्कि आय का एक नया जरिया बन गया है। इस मॉडल की सफलता ने अन्य ग्रामीण क्षेत्रों को भी इसी तरह की पहल अपनाने के लिए प्रेरित किया है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा ने इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है, जिससे यह देश भर के गांवों के लिए एक मार्गदर्शक बन गया है कि कैसे कचरे को मूल्यवान संसाधन में बदला जा सकता है।








