Bihar Bagmati Project: बिहार में बागमती तटबंध परियोजना को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दरभंगा और मुजफ्फरपुर जिलों के हजारों किसानों ने इस परियोजना के विरोध में मोर्चा खोल दिया है, उनका कहना है कि यह उनके जीवन और खेती-किसानी को बर्बाद कर देगा। चास वास बचाओ अभियान के संयोजक जितेंद्र यादव ने आज हुई एक बैठक में सरकार की मनमानी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जितेंद्र यादव ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बागमती तटबंध परियोजना के विनाशकारी प्रभावों से दरभंगा और मुजफ्फरपुर जिला के हजारों किसानों का जीवन पूरी तरह तबाह हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का विरोध 2011 से लगातार दरभंगा और मुजफ्फरपुर के हजारों किसान करते आ रहे हैं।







समीक्षा समिति बनी, पर काम नहीं हुआ
किसानों के लगातार विरोध को देखते हुए साल 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर बागमती तटबंध परियोजना की समीक्षा के लिए एक 9 सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समीक्षा समिति में किसानों की ओर से चार प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था।
समिति में प्रसिद्ध नदी विशेषज्ञ दिनेश कुमार मिश्र, आईआईटी कानपुर के डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ से प्रो. राजीव सिन्हा, एनआईटी पटना के नदी विशेषज्ञ प्रो. रामाकार झा और पर्यावरण कार्यकर्ता श्री अनिल प्रकाश जैसे दिग्गज शामिल थे।
हालांकि, इस महत्वपूर्ण समिति की बैठक शुरुआत में सिर्फ एक बार ही हो पाई। उसके बाद से आज तक इसकी दोबारा बैठक नहीं हुई है, जिससे समिति का अध्ययन और निर्णय अधर में लटका हुआ है। किसानों का आरोप है कि अब सरकार इस समीक्षा समिति के अध्ययन और किसी भी निर्णय के बिना ही विनाशकारी बागमती बांध निर्माण के लिए फिर से सक्रिय हो गई है।
किसानों की मांग: पहले समग्र अध्ययन, फिर निर्माण
बैठक में शामिल नवल किशोर सिंह ने सरकार से स्पष्ट मांग की है। उन्होंने कहा कि सभी किसान चाहते हैं कि बागमती तटबंध निर्माण से पहले एक समग्र अध्ययन हो। इस अध्ययन में यह देखा जाए कि तटबंध निर्माण से किसानों की खेती-किसानी पर क्या असर पड़ेगा, पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर इसका क्या प्रभाव होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन सभी पहलुओं पर उचित अध्ययन के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।
अध्ययन समिति का गठन और हाईकोर्ट में जनहित याचिका
किसानों ने अपनी रणनीति तय करते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। बैठक में यह निर्णय हुआ कि 15 अगस्त के बाद डॉ. विद्यानाथ झा की अध्यक्षता में एक ‘अध्ययन समिति’ का गठन किया जाएगा। इस समिति में वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण, भूगोल और कृषि विज्ञान से संबंधित विशेषज्ञ शामिल होंगे। इस अध्ययन समिति की रिपोर्ट के आधार पर किसानों की तरफ से पटना उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की जाएगी।
इस महत्वपूर्ण बैठक में मुजफ्फरपुर से जितेंद्र यादव, नवल किशोर सिंह, राम लोचन सिंह, राज कुमार मंडल और विवेक कुमार उपस्थित थे। वहीं, दरभंगा से प्रो. विद्यानाथ झा, तसीम नवाब और नारायण जी चौधरी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बैठक का संयोजन नारायण जी चौधरी ने किया। किसानों का यह कदम सरकार पर दबाव बनाने और अपनी मांगों को मनवाने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है। पढ़िए विस्तार से
अध्ययन समिति का गठन और हाईकोर्ट में जनहित याचिका
बागमती तटबंध परियोजना के विनाशकारी प्रभाव से दरभंगा और मुजफ्फरपुर जिला के हजारों किसानों के जीवन बर्वाद होंगे. यह बात आज के मिटिंग में चास वास बचाओ अभियान के संयोजक जितेंद्र यादव ने कहा. बगमती तटबंध परियोजना का विरोध 2011 से दरभंगा और मुजफ्फरपुर के हजारों किसानों द्वारा लगातार किया जा रहा है.
तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
इसी क्रम में वागमती तटबंध परियोजना के रिव्यू हेतु 9 सदस्यों का एक रिव्यू कमिटी का गठन साल 2017 मे तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर बनी, जिसमें किसान के तरफ से चार लोगों को शामिल किये गए, जिसमें प्रसिद्ध नदी विशषज्ञ दिनेश कुमार मिश्र, प्रो राजीव सिन्हा, डिपार्टमेंट ऑफ़ अर्थ, आईआईटी कानपुर, प्रो रामाकार झा, नदी विशेषज्ञ, एन.आई.टी., पटना और अनिल प्रकाश, पर्यावरण कार्यकर्त्ता हैं शामिल हैं.
रिव्यू कमेटी की बैठक कब होगी?
बागमती तटबंध परियोजना के रिव्यू कमेटी की बैठक शुरू में एक बार हुई थी. लेकिन उसके बाद से आज तक दोबारा इस रिव्यू कमेटी की बैठक नहीं हुई है. सरकार अब बिना रिव्यू कमेटी के अध्ययन और निर्णय के ही विनाशकारी बगमती बांध निर्माण करने के लिए पुनः सक्रिय हो गई है. यह जानकारी बैठक में दी गयी.
नवल किशोर सिंह ने कहा
नवल किशोर सिंह ने कहा कि हम सभी किसान चाहते हैं कि बागमती तटबंध निर्माण से पूर्व एक समग्रता में अध्ययन हो ताकि तटबंध निर्माण से किसानों के खेती-किसानी पर क्या प्रभाव होगा, पर्यावरण और परिस्थिति की पर क्या असर होगा, इसके बारे में प्रोपर अध्ययन हो जाना चाहिए.
15 अगस्त के बाद के जानिए फैसला
बैठक में यह निर्णय लिया गया की 15 अगस्त के बाद डॉ विद्यानाथ झा के अध्यक्षता में एक ‘अध्ययन समिति’ का गठन होगा जिसमें वनस्पति, पर्यावरण, भूगोल, कृषि विज्ञान से संबंधित विशेषज्ञ भाग लेंगे. अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर पटना उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका किसानों के तरफ से दायर किया जाएगा.
आज के बैठक में मुजफ्फरपुर से जितेंद्र यादव, नवल किशोर सिंह, राम लोचन सिंह, राज कुमार मंडल, विवेक कुमार शामिल हुए और दरभंगा से प्रो विद्यानाथ झा, तसीम नवाब और नारायण जी चौधरी भाग लिए.









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