मुख्य बातें: डीएमसीएच परिसर के लिए यह कोई नई बात नहीं है। कारण, वहां परिसर के आसपास के इलाकों में ऐसी घटनाएं कई बार हो चुकी है जहां मानवता को नोचते कुत्ते अकसर मिल जाते हैं, क्योंकि कोई ना कोई ऐसा कुकर्म कर ही जाता है जिससे बदनामी प्रशासन की होती है और स्वास्थ्य महकमा चाहकर भी इसे रोक नहीं पाता है, हां कार्रवाई और आगे ऐसा ना हो इसकी ताकीद जरूर दिखती है लेकिन इसबार जो दिखा वह एक अलग ही मानवीय पहलू का नजारा था जहां अस्पताल के कर्मियों की दिखाई दरियादिली संपूर्ण मानवता आज गदगद है। पढ़िए अजित कुमार वर्मा की यह रिपोर्ट..
दरभंगा मेडिकल अस्पताल यूं तो कई तरह सुर्खियां बंटोरता रहा है। लेकिन कुछ ऐसे वाकया ऐसे भी होते हैं जो उनकी सुर्खियों में बने रहने को मानवता की मिसाल के रूप में पेश करता है। ऐसा ही एक मामला 16 नवंबर को देखने (Dogs scratching humanity in Darbhanga) को मिला है। पढ़िए पूरी खबर
मामला डीएमसीएचके गायनी विभाग का है जहां एक महिला ने अपने कोख से जन्मे एक मृत बच्चे को जन्म दिया। उसके परिजनों ने उस मृत बच्चों को कहीं दफनाया नहीं और गायनी-सर्जरी विभाग के जाने वाले रास्ते में यूं ही फेंक दिया। लोगों की नजर उस पर तब पड़ी जब कुत्ते को कुछ लोगों ने उसे नोचता देखा।
धीरे-धीरे यह बात आग की तरह फैल गई और लोग एकजुट हुए। लेकिन उस परिजन की तलाश नहीं हो सकी, जिन्होंने ऐसा कुकर्म किया था। अंततः गायनी और सर्जरी विभाग के कुछ कर्मियों ने अपनी दरियादिली दिखाते हुए उस मृत बच्चे के शब को दफनाने का जिम्मा लिया।
और उसे दफनाकर मानवता की एक नई मिसाल पेश की। साथी साथ एक संदेश भी दिया की आप अपने में मानवता को जीवित रखें और जीवित और मृत दोनों के प्रति समान संवेदना का प्रदर्शन करें तो जीवन बेहतर हो सकता है।

















