JDU Congress: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। जदयू के दो वरिष्ठ नेताओं ने विपक्ष की रणनीति, राजनीतिक सक्रियता और संसद के बाहर किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस हमले में राहुल गांधी की भूमिका से लेकर गठबंधन की जमीनी मौजूदगी तक हर पहलू पर सवाल उठाए गए हैं।
जदयू एमएलसी नीरज कुमार ने विपक्षी गठबंधन की एकजुटता और राजनीतिक सक्रियता पर संदेह व्यक्त किया। उन्होंने पूछा कि क्या इंडी गठबंधन वास्तव में राजनीतिक रूप से सक्रिय है? नीरज कुमार ने पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां गठबंधन की कोई प्रभावी मौजूदगी दिखाई नहीं दी, जिससे उसकी एकजुटता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने विपक्ष की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि जनता ने अपने प्रतिनिधियों को संसद में किस उद्देश्य से भेजा है, इसे समझने की जरूरत है। उनके अनुसार, संसद के बाहर ‘मॉक पार्लियामेंट’ आयोजित करने के बजाय सदन के भीतर जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए।
विपक्ष पर राजनीतिक अस्थिरता फैलाने का आरोप
नीरज कुमार ने संसद के विशेष सत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि गृह मंत्री की ओर से विशेष सत्र बुलाने की बात कही जा रही है और सरकार विपक्ष की सहमति के साथ आगे बढ़ने को तैयार है। ऐसे में विपक्ष की ओर से लगातार विरोध किए जाने का कोई औचित्य नहीं है। जदयू एमएलसी ने आरोप लगाया कि विपक्ष देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनाने और संवैधानिक संस्थाओं पर बेवजह सवाल उठाने की कोशिश कर रहा है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
‘संसद को सड़क पर लाकर मजाक बनाया जा रहा’
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कांग्रेस द्वारा संसद के बाहर किए जा रहे राजनीतिक कार्यक्रमों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पहले ‘सड़क से संसद तक’ का नारा राजनीतिक आंदोलनों में इस्तेमाल होता था, लेकिन अब संसद को सड़क पर लाकर उसकी कार्यवाही को मजाकिया नजरिए से देखने की कोशिश की जा रही है, जो संसदीय गरिमा के खिलाफ है।
राजीव रंजन ने कहा, ‘संसद को सड़क पर लाकर उसकी कार्यवाही को मजाक के रूप में पेश करना उचित नहीं है। यह संसदीय परंपराओं और गरिमा के विपरीत है।’
राजीव रंजन ने निर्वाचन आयोग से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयोग की कार्यशैली को लेकर याचिकाएं पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं। ऐसे में न्यायपालिका में भरोसा रखते हुए कानूनी प्रक्रिया का इंतजार किया जाना चाहिए, न कि संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन कर माहौल खराब करना चाहिए।
राहुल गांधी की भूमिका और आंदोलन के तरीकों पर सवाल
जदयू प्रवक्ता ने कांग्रेस के मौजूदा राजनीतिक रवैये पर भी टिप्पणी की। राजीव रंजन ने आरोप लगाया कि पार्टी में राहुल गांधी की बातों और फैसलों को अत्यधिक प्रमुखता दी जा रही है, और कांग्रेस के दूसरे नेता उनके फैसलों को स्वीकार करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं देख पा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के आंदोलन की तारीखों और उसके तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाए। राजीव रंजन ने बताया कि व्यापारी संगठनों ने इस संबंध में सोनिया गांधी और राहुल गांधी तक अपनी चिंता पहुंचाई थी कि त्योहारों के मौसम में आंदोलन के कारण आम लोगों और कारोबारियों को सड़कों पर परेशानी हो सकती है।
राजीव रंजन के मुताबिक, यदि किसी राजनीतिक दल का आंदोलन जनता के हित में है, तो उसके तरीके और समय को लेकर जनता की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जब व्यापारी संगठन और आम लोग आंदोलन की तारीखों को लेकर असुविधा जता रहे हैं, तो कांग्रेस को अपने कार्यक्रम में बदलाव करने पर विचार करना चाहिए, ताकि जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।

















