Hyderabad Mithila Puja: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में इन दिनों मिथिला की संस्कृति और परंपरा की अनूठी छटा बिखरी हुई है। यहां चल रहा 10 दिवसीय गणेश पूजनोत्सव प्रवासी मैथिलों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इस उत्सव का मुख्य आकर्षण नंदी की पीठ पर शिव का वेश धारण किए 15 फीट ऊंची गणपति की भव्य प्रतिमा है, जिसे देखने दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
झा फ्रेंड्स एसोसिएशन पिछले 30 वर्षों से यह भव्य आयोजन कर रहा है। सोमवार की देर शाम उप्पल विधानसभा क्षेत्र तेलंगाना के बीएमसी विधायक बंडारी लक्ष्मण रेड्डी भी पूजा पंडाल का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने मिथिला पद्धति से होने वाली विशेष आरती में भी पूरे श्रद्धाभाव से भाग लिया। एसोसिएशन की ओर से विधायक रेड्डी का स्वागत मिथिला चित्रकला से सुसज्जित पाग और चादर भेंट कर किया गया। इस मौके पर मिथिला सामाजिक मंच, ग्रेटर हैदराबाद के संरक्षक शंभुनाथ झा, अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार झा और महासचिव रंजन कुमार के साथ विद्यापति सेवा संस्थान, दरभंगा के मीडिया संयोजक डॉ. प्रवीण कुमार झा की भी विशेष उपस्थिति दर्ज की गई।
मिथिला परंपरा से गणपति पूजन: 30 साल पुरानी विरासत
झा फ्रेंड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिगंबर झा ने बताया कि तेलंगाना क्षेत्र में विघ्नहर्ता गणपति के पूजन की परंपरा काफी पुरानी है। हालांकि, झा फ्रेंड्स एसोसिएशन द्वारा मिथिला पद्धति से आयोजित यह 10 दिवसीय गणपति पूजनोत्सव हमेशा से ही प्रवासी मैथिल समुदाय के साथ-साथ स्थानीय आबादी के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा है। यह आयोजन दूर बैठे मैथिलों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का एक सशक्त माध्यम बन गया है।
संगठन के अध्यक्ष दिगंबर झा ने कहा, “तेलंगाना में वैसे तो विघ्नहर्ता गणपति के पूजन की परंपरा बहुत पुरानी है, लेकिन झा फ्रेंड्स एसोसिएशन का यह 10 दिवसीय पूजनोत्सव प्रवासी मैथिल जन के साथ ही स्थानीय लोगों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।”
बच्चों के हुनर को निखारने का मंच
मुख्य यजमान चंदन कुमार झा ने इस पूजन उत्सव की एक और खास विशेषता बताई। उन्होंने कहा कि बच्चों में छिपी प्रतिभाओं को निखारने और उनका उत्साहवर्धन करने के उद्देश्य से प्रतिदिन विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इनमें नृत्य, गायन, चित्रकारी, रंगोली, तंबोला और म्यूजिकल चेयर जैसे खेल शामिल हैं, जो बच्चों को अपनी कला दिखाने का अवसर देते हैं।
यह 10 दिवसीय पर्व अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। बृहस्पतिवार को हवन और अन्नदानम का आयोजन होगा, जिसके बाद शुक्रवार को गणपति का भव्य विसर्जन किया जाएगा। यह आयोजन हैदराबाद में मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सफल प्रयास है।






