Justice Harishchandra Mishra: दिल्ली के लोकायुक्त और झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हरिश्चंद्र मिश्रा अब नहीं रहे। गुरुवार को दिल्ली स्थित उनके आवास पर 67 वर्ष की आयु में उनका आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही बिहार समेत देश के न्यायिक और कानूनी गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई, खासकर दरभंगा के वकीलों में गहरा दुख देखा गया।
न्यायिक जगत में बड़ा नुकसान, मधुबनी से था गहरा नाता
न्यायमूर्ति हरिश्चंद्र मिश्रा का निधन न्यायिक बिरादरी के लिए एक बड़ी क्षति है। गुरुवार को दरभंगा के वकालतखाना भवन में लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा की अध्यक्षता में एक शोक सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान वकीलों ने स्वर्गीय मिश्रा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी ने सभा में बताया कि, ‘स्व. मिश्रा मधुबनी जिला के गनौली गांव के मूल निवासी थे। वे झारखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश पद पर रहे तथा इनके पिता स्व. विश्वनाथ मिश्र भी न्यायमूर्ति थे।’ यह तथ्य उनके बिहार से गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।

झारखंड हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के तौर पर किया काम
न्यायमूर्ति हरिश्चंद्र मिश्रा का न्यायिक करियर बेहद शानदार रहा। उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। बाद में उन्हें दिल्ली का लोकायुक्त नियुक्त किया गया, जहाँ उन्होंने ईमानदारी और निष्पक्षता से अपनी सेवाएँ दीं। उनके पिता, स्वर्गीय विश्वनाथ मिश्र भी एक प्रतिष्ठित न्यायमूर्ति थे, जिससे उनके परिवार का न्यायिक परंपरा से पुराना संबंध स्पष्ट होता है।
अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी ने बताया, “स्व. मिश्रा मधुबनी जिला के गनौली गांव के मूल निवासी थे। वे झारखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश पद पर रहे तथा इनके पिता स्व. विश्वनाथ मिश्र भी न्यायमूर्ति थे।”
शोक सभा में अचलेन्द्रनाथ झा, हीरानंद मिश्रा, विवेक कुमार सिंह, कुमार उत्तम, मुरारीलाल केवट, प्रदीप यादव, किरण कुमारी, शिवम कुमार त्रिपाठी, अनीता आनंद, सनोज कुमार, संतोष कुमार सिन्हा, पंकज कुमार, कमल पाण्डेय, अनिल कुमार मिश्रा और अधिवक्ता लिपिक विनय कुमार झा सहित कई वकीलों ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। सभी ने न्यायमूर्ति मिश्रा के निधन को न्यायिक क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया और उनके योगदान को याद किया।







