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मार्च, 15, 2026
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Darbhanga LIC Strike: पुरानी पेंशन को लेकर कर्मचारियों का बड़ा LIC Strike, दिनभर ठप रहा कामकाज…पॉलिसीधारकों को भारी परेशानी

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LIC Strike: देश की आर्थिक रीढ़ की हिफाजत करने वाले ही जब अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगें तो समझिए व्यवस्था में कोई बड़ी चूक है। दरभंगा में भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारियों ने कुछ इसी तरह अपनी मांगों को लेकर बुलंद आवाज में सरकार को जगाने का प्रयास किया।

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दरभंगा में बृहस्पतिवार का दिन गहमागहमी भरा रहा जब भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी एक दिवसीय कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर चले गए। इस वजह से जिले की सभी शाखाओं में कामकाज पूरी तरह ठप रहा और पॉलिसीधारकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कर्मचारियों का यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से पुरानी पेंशन प्रणाली को फिर से लागू करने और बीमा क्षेत्र में बढ़ते निजीकरण के खिलाफ था।

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क्यों हुई यह LIC Strike, जानें प्रमुख मांगें

कर्मचारी संघ के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह हड़ताल सरकार की नीतियों के खिलाफ एक चेतावनी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं, जिन पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कर्मचारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

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  • पुरानी पेंशन योजना (old pension scheme) को तत्काल प्रभाव से फिर से बहाल किया जाए।
  • बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए।
  • लिपिक (क्लर्क) और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के खाली पदों पर तत्काल नई बहाली की जाए।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) का निजीकरण करने की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए।
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कर्मचारियों का कहना है कि नई पेंशन योजना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है, इसलिए वे हर हाल में old pension scheme की बहाली चाहते हैं।

“मांगें नहीं मानी तो होगी लंबी लड़ाई”

हड़ताल के दौरान एलआईसी के आईयूएमडी दरभंगा शाखा के सचिव कुंदन कुमार ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “यदि सरकार नए श्रमिक कानूनों को वापस नहीं लेती है और हमारी मांगों पर विचार नहीं करती है, तो यह लड़ाई और भी लंबी चलेगी। हम सब लंबे समय के लिए हड़ताल पर जाने को विवश हो जाएंगे।” उन्होंने कहा कि कम कर्मचारियों के बावजूद हम पॉलिसीधारकों को बेहतर सेवा दे रहे हैं, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा रहा है।

वहीं, एमडीआईइए के सचिव किशन कुमार ने भी निजीकरण पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि पीएसयू का निजीकरण किसी भी हाल में बंद होना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने स्टाफ की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सहायक एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की नई बहाली अत्यंत आवश्यक है, ताकि लाखों पॉलिसीधारकों को समय पर और बेहतर सेवा दी जा सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

जिले भर के कार्यालयों में लटका रहा ताला

इस हड़ताल का असर पूरे जिले में देखने को मिला। दरभंगा शहर स्थित मुख्य शाखा, लहेरियासराय शाखा के साथ-साथ बेनीपुर और सकरी स्थित सेटेलाइट शाखाओं के सभी कर्मचारी भी इस हड़ताल में शामिल रहे। कार्यालयों के बाहर कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते दिखे। हड़ताल में कुंदन आकाश, कृष्ण आदित्या, संजय कुमार, गौरव कुमार, मनोज राम, सुरेश कुमार, विजय कुमार, पवन कुमार, सुरेश कुमार मिश्रा, शैलेंद्र झा, सदरे आलम, मनोहर पूर्वे, आंचल भारद्वाज, अंजली कुमारी, और पूजा कुमारी समेत दर्जनों कर्मचारी शामिल थे।

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