Bhojpur Encounter News: बिहार के भोजपुर जिले में हुए भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शाहपुर के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए पुलिस मुठभेड़ के बाद दर्ज प्राथमिकी से मृतक भारत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी का नाम हटा दिया गया है। पुलिस के इस फैसले से परिवार को बड़ी राहत मिली है, जबकि घटना की न्यायिक जांच अभी भी जारी है।
भोजपुर एनकाउंटर: भरत तिवारी के पिता-भाई को मिली बड़ी राहत, FIR से हटा नाम!
Bhojpur Encounter Case: आरा से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, भोजपुर के बहुचर्चित बिलौटी एनकाउंटर मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस टीम पर जानलेवा फायरिंग के आरोप में दर्ज प्राथमिकी से मृतक भरत भूषण तिवारी के पिता और भाई का नाम आधिकारिक तौर पर हटा दिया गया है, जिससे उनके परिजनों को बड़ी राहत मिली है। इस मामले के गहन सुपरविजन के बाद दोनों को पूरी तरह निर्दोष पाया गया।






भोजपुर पुलिस अधीक्षक राज ने इस नाम विलोपन की पुष्टि की है। यह निर्णय वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद लिया गया है, जिसने इस संवेदनशील Bhojpur Encounter Case को एक नया मोड़ दिया है।
जांच में निर्दोष पाए गए भरत तिवारी के पिता-भाई
पूर्व घटनाक्रम के अनुसार, पुलिस पर अचानक फायरिंग करने के आरोप में दर्ज केस में भरत भूषण तिवारी के पिता काशी नाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी के खिलाफ मुख्य रूप से आर्म्स एक्ट के उल्लंघन और वारदात के दौरान भरत भूषण तिवारी को सहयोग करने का गंभीर आरोप लगा था। तत्कालीन जांच के आधार पर दोनों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था।
हालांकि, परिजनों और स्थानीय समाज द्वारा लगातार इसे एक साजिश बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही थी। अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की गहन समीक्षा में इन आरोपों को आधारहीन पाया गया है, जिससे इन दोनों को बड़ी राहत मिली है।
क्या थे शुरुआती आरोप और दर्ज धाराएं?
उल्लेखनीय है कि बीते 17 जून की सुबह पुलिस टीम पर फायरिंग होने के मामले में शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार के लिखित बयान पर यह मामला दर्ज हुआ था। इसमें मुख्य आरोपी भरत भूषण तिवारी के साथ-साथ उसके पिता काशी नाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न सुसंगत धाराएं 132, 109(1), 351(2) और 352 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
इस घटना के बाद से ही पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त था। एसपी राज ने बताया कि जांच में पिता और भाई की घटनास्थल पर मौजूदगी या अपराध में संलिप्तता का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है, जिसके बाद उनके नाम हटाने का निर्णय लिया गया।
पुलिस अधीक्षक ने की पुष्टि, परिवार अब भी उच्च स्तरीय जांच की मांग पर अड़ा
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस संवेदनशील केस के गहन सुपरविजन और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद, पिता और भाई का नाम एफआईआर से हटाने का अंतिम निर्णय लिया गया। इस कानूनी राहत के बाद भरत भूषण तिवारी के परिजनों ने संतोष व्यक्त किया है।
हालांकि, वे अब भी पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि पुलिस प्रशासन ने आरोपों की गंभीरता को समझते हुए पुनर्विचार किया और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
FIR से क्यों हटाए गए पिता-भाई के नाम?
शुरुआत में शाहपुर थाने में दर्ज मामले में भारत भूषण तिवारी के साथ उनके पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया था। प्राथमिकी में पुलिस टीम पर हमला करने, आर्म्स एक्ट का उल्लंघन करने और भारत तिवारी को शरण देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, अब पुलिस ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद काशीनाथ तिवारी और चंदन तिवारी का नाम केस से हटा दिया है।
भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) राज ने इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों का गहनता से परीक्षण करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। एसपी ने यह भी स्पष्ट किया कि एनकाउंटर से जुड़ी मुख्य जांच अभी भी जारी है और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पूरे बिहार में सुर्खियों में रहा था एनकाउंटर
यह घटना 17 जून की सुबह बिलौटी गांव में हुई थी, जिसने पूरे बिहार में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी थी। पुलिस का दावा है कि भारत तिवारी पुलिसकर्मियों के साथ गोलीबारी में घायल हुए थे और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। वहीं, भारत तिवारी का परिवार पुलिस के इस दावे को सिरे से खारिज करता है।
परिवार का आरोप है कि भारत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गोली मार दी। परिवार की शिकायत के आधार पर, इस मामले में पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ हत्या का एक अलग मामला भी दर्ज किया गया है। इस घटना के बाद बिलौटी गांव में एक बड़ी महापंचायत भी हुई थी, जिसमें न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
न्यायिक जांच आयोग कर रहा मामले की पड़ताल
इस बहुचर्चित एनकाउंटर की स्वतंत्र जांच की बढ़ती मांगों के बीच, बिहार सरकार ने एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है। पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा इस आयोग की अध्यक्षता कर रहे हैं। आयोग ने अपनी जांच शुरू कर दी है और हाल ही में बिलौटी गांव का दौरा किया था।
जांच के दौरान, जस्टिस सिन्हा ने एनकाउंटर स्थल का निरीक्षण किया और भारत तिवारी के परिवार से मुलाकात की। परिवार के सदस्यों ने पुलिस के बयानों पर सवाल उठाए और आयोग से निष्पक्ष जांच करने का आग्रह किया। जस्टिस सिन्हा ने परिवार को आश्वासन दिया है कि मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जाएगी और रिपोर्ट सौंपने से पहले सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा ने परिवार को आश्वासन दिया कि मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जाएगी और रिपोर्ट सौंपने से पहले सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
भारत भूषण तिवारी के पिता और भाई का नाम प्राथमिकी से हटाया जाना परिवार के लिए एक बड़ी राहत है, लेकिन एनकाउंटर से जुड़े केंद्रीय सवाल अभी भी जांच के दायरे में हैं। परिवार लगातार जवाबदेही की मांग कर रहा है और उनका मानना है कि पुलिस की कार्रवाई गैरकानूनी थी। पुलिस का कहना है कि जांच कानून के दायरे में आगे बढ़ रही है और जल्द ही सत्य सामने आएगा।








