केवटी, दरभंगा | जवाहर नवोदय विद्यालय, केवटी के आठवीं कक्षा के छात्र जतिन गौतम की संदिग्ध मौत के मामले में उच्च स्तरीय सीबीआई जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रखंड मुख्यालय पर चल रहा धरना और अनशन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है।






विद्यालय और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
धरना स्थल पर लोगों ने विद्यालय प्रशासन और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
धरनार्थियों का कहना है कि:
“जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जातीं, धरना और अनशन जारी रहेगा।”
परिजनों का आरोप: साजिश पर पर्दा डालने की कोशिश
मृतक छात्र के पिता संतोष कुमार साह और माता रूबी देवी (मुखिया, केवटी पंचायत) का आरोप है कि घटना के एक महीने बीत जाने के बाद भी विद्यालय प्रशासन और पुलिस प्रशासन साजिश पर पर्दा डालने का काम कर रहे हैं।
एफआईआर में नामजद हाउस मास्टर, प्रिंसिपल और अन्य आरोपियों की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है।
उनका कहना है:
“यह केवल मेरे पुत्र को न्याय दिलाने का मामला नहीं है, बल्कि विद्यालय में पढ़ रहे अन्य बच्चों की सुरक्षा का भी सवाल है।”
उच्च स्तरीय जांच की मांग
धरनार्थियों की मुख्य मांगें:
सीबीआई या न्यायिक स्तर की उच्च स्तरीय जांच
नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी
विद्यालय में सुरक्षा मानकों का पालन
मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन
धरना/अनशन में स्थानीय विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा ने भाग लिया।
विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दलों के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अगर जांच पारदर्शी नहीं हुई, तो आंदोलन को जिला स्तर और राज्य स्तर पर ले जाया जाएगा।
पृष्ठभूमि: जतिन गौतम की संदिग्ध मौत
जतिन गौतम, जवाहर नवोदय विद्यालय (केवटी, दरभंगा) का छात्र था।
पिछले महीने उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
परिवार का आरोप है कि यह हत्या का मामला है और विद्यालय प्रशासन घटना को आत्महत्या बताकर मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है।
जवाहर नवोदय विद्यालय (विकिपीडिया) देश भर में प्रतिष्ठित विद्यालयों की श्रृंखला है, लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गांव में गुस्सा और चिंता का माहौल
केवटी और आसपास के गांवों में इस घटना को लेकर गुस्सा और चिंता बनी हुई है।
अभिभावकों का कहना है कि यदि समय पर न्याय नहीं मिला, तो वे अपने बच्चों को विद्यालय से निकालने पर विचार करेंगे।








