India Iran Strait of Hormuz: भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री आवाजाही पर लगी पाबंदियों से भारत को विशेष छूट प्रदान की है। इस महत्वपूर्ण घोषणा से अब भारत के जहाज बिना किसी बाधा के इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजर सकेंगे। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अहमद हयात मोघद्दम ने 3 नवंबर को तेहरान से इस फैसले का एलान किया।

यह विशेष छूट केवल भारत को ही नहीं, बल्कि इराक, चीन और कतर को भी मिली है। इन देशों के जहाजों को अब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए किसी रोक-टोक का सामना नहीं करना पड़ेगा, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम हिस्सा है। भारत की अर्थव्यवस्था और उसकी ऊर्जा जरूरतें खाड़ी देशों पर बहुत हद तक निर्भर करती हैं, ऐसे में ईरान का यह निर्णय बेहद अहम माना जा रहा है।
अहमद हयात मोघद्दम ने स्पष्ट किया, ‘ईरान ने इन चारों देशों को विशेष छूट दी है। इन देशों के जहाज होर्मुज से बिना रोक-टोक के गुजर सकेंगे। अमेरिका भी इनके मामलों में कोई दखल नहीं देता है।’
भारत के लिए क्यों अहम है यह छूट?
ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दी गई यह छूट भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगी। दुनिया की ईंधन आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 90 फीसद हिस्सा होर्मुज के रास्ते ही आयात करता है। इसके अलावा, यूएई और कतर से आने वाली 50 फीसद से अधिक एलएनजी भी इसी मार्ग से भारत पहुंचती है।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 90 फीसद विदेश से आयात करता है, जिसमें से 30 फीसद होर्मुज के रास्ते आता है। संघर्ष से पहले यह आंकड़ा 70 फीसद तक था, हालांकि बाद में भारत सरकार ने तेल खरीद के स्रोतों में विविधता लाई है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल हमले के बाद से होर्मुज से समुद्री यातायात प्रभावित हुआ था, जिससे भारत की आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव था।
किन देशों को मिली विशेष रियायत और क्यों?
ईरान ने भारत समेत कुल चार देशों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही की विशेष छूट दी है। अहमद हयात मोघद्दम ने इसके पीछे की वजह भी बताई है। भारत को यह रियायत इसलिए मिली है ताकि तेहरान वहां से दवाइयों का आयात आसानी से कर सके। चीन को ईरान से राजनीतिक समर्थन हासिल है, जिसके कारण उसे यह छूट प्रदान की गई है। कतर के जहाजों पर ईरान कोई ट्रांजिट टोल भी नहीं लगाएगा। मोघद्दम के अनुसार, यह छूट विशिष्ट समझौतों और शर्तों के आधार पर दी गई है, हालांकि चीनी और भारतीय जहाजों को ट्रांजिट फीस का भुगतान करना होगा।
आगे क्या होगा असर?
ईरान के इस कदम से भारत की आयात-निर्यात प्रक्रियाएं सुगम होंगी और ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता कम होगी। यह फैसला दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करेगा, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। भारत के लिए यह छूट न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में एक बड़ी बाधा को दूर करती है।







