Bihar Construction Projects: बिहार में चल रही प्रमुख निर्माण परियोजनाओं की धीमी गति पर राज्य के भवन निर्माण विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने मंगलवार को पटना में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजनाओं की गुणवत्ता और समय-सीमा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कुछ योजनाओं में हो रही देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की और उन्हें निर्धारित लक्ष्य के भीतर पूरा करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए।







विश्वेश्वरैया भवन में हुई इस समीक्षा बैठक में संरचनात्मक उप-प्रभाग के तहत चल रहे विद्युत कार्यों सहित सभी प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया। प्रणव कुमार ने भौतिक प्रगति, निर्माण गुणवत्ता और क्रियान्वयन की समय-सीमा की गहन समीक्षा की। उन्होंने बाधाओं की पहचान की और परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के उपायों पर चर्चा की। इस दौरान विभाग के अपर सचिव, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और कार्यपालक अभियंता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
कई अहम परियोजनाओं की समीक्षा, निर्धारित हुई नई समय-सीमा
बैठक में राज्य की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें पटना में एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी, बिहार इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय, संयुक्त भवन, सबौर स्थित कृषि जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, आरा स्थित कृषि इंजीनियरिंग महाविद्यालय और प्रस्तावित जीविका मुख्यालय शामिल हैं। सचिव ने अधिकारियों को उच्च निर्माण मानकों को बनाए रखते हुए सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।
- बिहार इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय: पटना में लगभग पांच एकड़ परिसर में बन रहा यह विश्वविद्यालय अंतिम चरण में है। फिनिशिंग का काम और परिसर की सफाई चल रही है। सचिव ने इंजीनियरों को एक सप्ताह के भीतर सभी शेष कार्य पूरे करने का निर्देश दिया।
- सबौर कृषि जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय: भागलपुर के सबौर में बन रहे इस महाविद्यालय में शैक्षणिक और प्रशासनिक भवन, लड़कों और लड़कियों के छात्रावास तथा एक पशु गृह निर्माणाधीन हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना दिसंबर 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है।
- आरा कृषि इंजीनियरिंग महाविद्यालय: आरा स्थित कृषि इंजीनियरिंग महाविद्यालय में अतिथि गृह और छात्रावासों का निर्माण भी उन्नत चरण में बताया गया।
- एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी, पटना: यहां दूसरे चरण के तहत ‘सस्टेनेबल प्लेनेट’, ‘एस्ट्रोनॉमी एंड स्पेस’ और ‘बॉडी एंड माइंड’ गैलरी के लिए प्रदर्शनियों की स्थापना की समीक्षा की गई। विभाग ने पहले चरण की शेष प्रदर्शनियों की स्थापना में भी तेजी लाने का निर्देश दिया।
- जीविका मुख्यालय: पटना में 0.92 एकड़ भूमि पर नए जीविका मुख्यालय के निर्माण के लिए एजेंसी का चयन कर लिया गया है। बैरिकेडिंग का काम शुरू हो गया है और प्रस्तावित भवन में ग्राउंड लेवल से ऊपर सात मंजिलें (G+7) होंगी।
- संयुक्त भवन: संयुक्त भवन के निर्माण की भी समीक्षा की गई और अधिकारियों को इसे जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया।
- बिहार विधानमंडल डिजिटल संग्रहालय: 1.74 एकड़ परिसर में बन रहे बिहार विधानमंडल के डिजिटल संग्रहालय की प्रगति का भी आकलन किया गया। यह संग्रहालय बिहार के विधानमंडल के इतिहास को डिजिटल रूप से दस्तावेजित करेगा, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों, विधानसभा अध्यक्षों, विधान परिषद के सभापतियों और विधायकों की जानकारी शामिल होगी। साथ ही, यह संस्था के शताब्दी वर्ष के इतिहास की डिजिटल प्रस्तुति भी देगा।
गुणवत्ता और समय-सीमा पर कोई समझौता नहीं: सचिव प्रणव कुमार
परियोजनाओं में हो रही देरी पर असंतोष व्यक्त करते हुए प्रणव कुमार ने अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने और परियोजना निगरानी को मजबूत करने का निर्देश दिया। उन्होंने विभाग के मुख्य अभियंता को निरंतर निगरानी बनाए रखने का निर्देश दिया और इंजीनियरों को चेतावनी दी कि निर्माण गुणवत्ता या परियोजना की समय-सीमा के पालन पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी कार्य निर्धारित मानकों और समय-सूची के अनुसार ही पूरे किए जाने चाहिए।
भवन निर्माण विभाग का यह कड़ा रुख राज्य में चल रही बिहार निर्माण परियोजनाओं को समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन निर्देशों का कितना पालन होता है और परियोजनाओं की गति कितनी बढ़ती है, यह देखना दिलचस्प होगा।









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