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बिहार में TB से मुक्ति का महाभियान: 14 अगस्त तक 1 करोड़ लोगों की जांच, जानें आपका जिला कितना तैयार? |मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने क्या कहा – कौन जिला टॉप पर, कौन आगे, कौन पीछे?

Bihar TB Elimination: मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने गहन समीक्षा के बाद दिए सख्त निर्देश, कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों को फटकार; कहा- हर ब्लॉक में नोडल अधिकारी नियुक्त करें.

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Bihar TB Elimination: बिहार सरकार ने राज्य से तपेदिक (टीबी) के उन्मूलन के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। 14 अगस्त तक प्रदेश में एक करोड़ लोगों की टीबी जांच की जाएगी। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में सोमवार को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में इस अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई, जहां अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए।

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बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 2 जुलाई से 9 जुलाई के बीच की अवधि में लगभग 1.6 मिलियन (16 लाख) लोगों की जांच की जा चुकी है। इस अभियान को और तेज करने के लिए सरकार युद्धस्तर पर काम कर रही है।

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बिहार में TB से मुक्ति का महाभियान: 14 अगस्त तक 1 करोड़ लोगों की जांच, जानें आपका जिला कितना तैयार? |मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने क्या कहा - कौन जिला टॉप पर, कौन आगे, कौन पीछे?

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परीक्षण में कितनी हुई प्रगति?

समीक्षा बैठक के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कमजोर आबादी के बीच 78,962 छाती के एक्स-रे किए गए। इसके साथ ही, 9,946 लोगों का न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (NAAT) भी किया गया। अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि 1,095 टीबी रोगियों का उपचार के लिए मूल्यांकन किया गया और 5,573 घरेलू संपर्कों को टीबी निवारक उपचार पर रखा गया।

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निक्षय पोषण योजना के तहत 24,673 लाभार्थियों को भुगतान जारी किया गया, जबकि निक्षय मित्रों के सहयोग से 1,032 फूड बास्केट वितरित किए गए। समीक्षा अवधि के दौरान राज्य में 2,595 नए टीबी रोगियों की पहचान की गई, जिन्हें अधिसूचित किया गया है।

टीबी से मुक्ति दिलाएगा बिहार! अब 1 करोड़ लोगों की होगी जांच, जानें क्या है सरकार का मास्टर प्लान

Bihar TB Elimination: बिहार सरकार ने राज्य से तपेदिक (टीबी) को खत्म करने के प्रयासों को तेज कर दिया है। इसके तहत, 14 अगस्त तक 1 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सोमवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में इस लक्ष्य की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि 2 जुलाई से 9 जुलाई के बीच चलाए गए अभियान के तहत अब तक लगभग 16 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

जांच और परीक्षण में प्रगति

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, समीक्षा अवधि के दौरान कमजोर आबादी के बीच 78,962 छाती के एक्स-रे किए गए, जबकि 9,946 लोगों का न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (NAAT) किया गया। अधिकारियों ने यह भी बताया कि 1,095 टीबी रोगियों का उपचार के लिए मूल्यांकन किया गया और 5,573 घरेलू संपर्कों को टीबी निवारक उपचार के तहत रखा गया।

निक्षय पोषण योजना के तहत 24,673 लाभार्थियों को भुगतान जारी किया गया, जबकि निक्षय मित्रों के सहयोग से 1,032 फूड बास्केट वितरित की गईं। समीक्षा अवधि के दौरान राज्य में 2,595 नए टीबी रोगियों की पहचान भी की गई।

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जिलों के प्रदर्शन की समीक्षा

स्वास्थ्य विभाग ने साप्ताहिक लक्ष्यों के मुकाबले जिलों के प्रदर्शन की समीक्षा की। इस दौरान सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिलों में सहरसा (341%), अरवल (288%), मुजफ्फरपुर (274%), औरंगाबाद (258%) और शेखपुरा (239%) शामिल रहे। वहीं, बक्सर (17%), जमुई (25%), अररिया (29%), सीतामढ़ी (30%) और पश्चिमी चंपारण (33%) सबसे कम प्रदर्शन करने वाले जिलों के रूप में पहचाने गए।

निगरानी मजबूत करने के निर्देश

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को 14 अगस्त के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अभियान को तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने जिलों को प्रत्येक ब्लॉक और वार्ड के लिए उप-समाहर्ता और अन्य जिला-स्तरीय अधिकारियों को समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया, ताकि अभियान के दौरान निगरानी को मजबूत किया जा सके और समन्वय में सुधार हो सके।

एनसीसी कैडेट भी देंगे सहयोग

राज्य सरकार टीबी उन्मूलन अभियान में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेटों को भी शामिल करने की योजना बना रही है। इससे सामुदायिक पहुंच का विस्तार होगा और जागरूकता व स्क्रीनिंग गतिविधियों को समर्थन मिलेगा। अधिकारियों ने कहा कि इस गहन अभियान का उद्देश्य शीघ्र पता लगाना, उपचार कवरेज को मजबूत करना और टीबी मुक्त बिहार की दिशा में प्रगति में तेजी लाना है।

जिलों का प्रदर्शन: कौन आगे, कौन पीछे?

स्वास्थ्य विभाग ने साप्ताहिक लक्ष्यों के विरुद्ध जिला-वार प्रदर्शन की समीक्षा की। इस समीक्षा में कुछ जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जबकि कुछ काफी पीछे रह गए।

  • उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिले:
  • सहरसा: 341%
  • अरवल: 288%
  • मुजफ्फरपुर: 274%
  • औरंगाबाद: 258%
  • शेखपुरा: 239%
  • सबसे कम प्रदर्शन करने वाले जिले:
  • बक्सर: 17%
  • जमुई: 25%
  • अररिया: 29%
  • सीतामढ़ी: 30%
  • पश्चिमी चंपारण: 33%
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मुख्य सचिव ने कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को फटकार लगाते हुए सुधार के निर्देश दिए। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बिहार में टीबी उन्मूलन के प्रयासों में क्षेत्रीय असमानताएँ मौजूद हैं, जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

निगरानी होगी मजबूत, NCC कैडेट भी जुड़ेंगे

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी जिलाधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को 14 अगस्त के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अभियान को तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने जिलों को प्रत्येक ब्लॉक और वार्ड के लिए उप-समाहर्ता (डिप्टी कलेक्टर) और अन्य जिला-स्तरीय अधिकारियों को समर्पित नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया, ताकि अभियान के दौरान निगरानी और समन्वय को मजबूत किया जा सके।

राज्य सरकार ने सामुदायिक पहुंच बढ़ाने और जागरूकता व जांच गतिविधियों में सहायता के लिए राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के कैडेटों को भी टीबी उन्मूलन अभियान में शामिल करने की योजना बनाई है। अधिकारियों ने बताया कि इस गहन अभियान का उद्देश्य शीघ्र पता लगाना, उपचार कवरेज को मजबूत करना और टीबी-मुक्त बिहार की दिशा में प्रगति में तेजी लाना है।

यह अभियान राज्य में टीबी के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य समय पर पहचान और प्रभावी उपचार सुनिश्चित कर इस गंभीर बीमारी को जड़ से खत्म करना है। आगामी दिनों में निगरानी और सामुदायिक भागीदारी से बिहार को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में तेजी से प्रगति की उम्मीद है।

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