Bihar Flood News: बिहार के हाजीपुर जिले में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई है। उत्तरी अकीलाबाद समेत आसपास के इलाकों में रिंग बांध तीन से चार जगहों पर टूट गया है, जिससे सैकड़ों घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन दिनों से यह समस्या बनी हुई है और लगातार जलस्तर बढ़ने से हालात और गंभीर होते जा रहे हैं।
350 से अधिक घर डूबे, हजारों लोग फंसे
उत्तरी अकीलाबाद इलाके में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। ग्रामीणों के मुताबिक, अकेले इस क्षेत्र में 350 से अधिक घर पानी से पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। लगभग 3 से 4 हजार लोग सीधे तौर पर इस आपदा से जूझ रहे हैं। कई घरों में पानी दो से तीन फीट ऊपर तक पहुंच गया है, जिससे कच्चे मकानों और दीवारों को भी भारी नुकसान हुआ है। लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भटकना पड़ रहा है।

खाने-पीने और चारे का गहराया संकट
बाढ़ के पानी ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लोगों के सामने रहने और खाने-पीने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। प्रभावितों का आरोप है कि उन्हें न तो पर्याप्त पीने का पानी मिल रहा है और न ही भोजन की उचित व्यवस्था की गई है। कई परिवार ऊंचे बांधों पर किसी तरह अपने बच्चों और सामान के साथ रहने को मजबूर हैं। इसके अलावा, खेती और पशुपालन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। किसानों ने केले की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान होने का दावा किया है, जबकि मवेशियों के चारे का संकट पशुपालकों की परेशानी बढ़ा रहा है। लोग पानी के बीच से केले के पत्ते और अन्य सामग्री लाकर अपने पशुओं को खिला रहे हैं।
प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने बांध टूटने की जानकारी प्रशासन को पहले ही दे दी थी। अधिकारियों ने मौके का मुआयना भी किया, लेकिन समय रहते बोरा डालकर बांध को मजबूत करने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। ग्रामीणों के अनुसार, फिलहाल सिर्फ एक गार्ड को तैनात किया गया है, जो दिनभर बढ़ते पानी पर नजर रख रहा है, लेकिन इससे समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
तत्काल राहत और मुआवजे की मांग
बाढ़ प्रभावित लोगों ने प्रशासन से तत्काल राहत पहुंचाने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में नाव, तिरपाल, पीने का पानी, भोजन और मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने में भी परेशानी हो रही है और कई परिवारों के पास फिलहाल कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है। किसानों ने बड़े पैमाने पर हुई फसल क्षति का आकलन कर उचित मुआवजे की भी मांग की है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने और राहत-बचाव कार्य युद्धस्तर पर शुरू कराने की अपील की है। उनका कहना है कि तीन दिनों से लगातार जलजमाव के बावजूद पर्याप्त राहत न मिलने से उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।







