Bihar Land Registry: जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाली कागजी उलझनें और कार्यालयों के चक्कर अब इतिहास बन जाएंगे। बिहार में जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस बनाने की दिशा में मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के सभी निबंधन कार्यालयों में यह नई व्यवस्था लागू होगी, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
नई सुविधा के तहत, डीड तैयार करने से लेकर स्टाम्प शुल्क का भुगतान, बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल हस्ताक्षर तक की सारी प्रक्रिया ऑनलाइन ही पूरी की जाएगी। रजिस्ट्री होने के बाद डिजिटल डीड की प्रति सीधे आपके वॉट्सएप या ई-मेल पर भेज दी जाएगी।
बड़ी खबर! बिहार में अब घर बैठे होगी जमीन की रजिस्ट्री, 75 साल से ऊपर वालों को खास सुविधा
Bihar Land Registry: जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले बिहार के लाखों लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब यह प्रक्रिया पूरी तरह से पेपरलेस होने जा रही है। राज्य के सभी निबंधन कार्यालयों में यह नई व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे लोगों को कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी। डीड तैयार करने से लेकर स्टांप शुल्क भुगतान, बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल हस्ताक्षर तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संपन्न होगी। रजिस्ट्री के बाद डिजिटल डीड की प्रति सीधे व्हाट्सएप या ई-मेल पर भेजी जाएगी।
17 अगस्त तक सभी 141 कार्यालयों में लागू होगी पेपरलेस रजिस्ट्री
मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने इस महत्वपूर्ण बदलाव को तेजी से लागू करने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में, राज्य के कुल 141 निबंधन कार्यालयों में से 51 में पेपरलेस रजिस्ट्री की सुविधा पहले ही शुरू हो चुकी है। बाकी बचे 91 कार्यालयों में भी 17 अगस्त तक इस प्रक्रिया को पूरी तरह से लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
विभाग के सचिव नवीन कुमार ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में इस प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने उन कार्यालयों में काम में तेजी लाने का निर्देश दिया है, जहाँ यह व्यवस्था अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। पहले चरण में 11 जुलाई को 10 कार्यालयों में पेपरलेस निबंधन शुरू किया गया था, इसके बाद 30 जुलाई को दूसरे चरण में 40 और कार्यालयों को इस व्यवस्था से जोड़ा गया।
75 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को घर पर मिलेगी रजिस्ट्री की सुविधा
इस नई व्यवस्था के तहत, 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को विशेष सुविधा मिलेगी। विभाग ने निर्देश दिया है कि ऐसे नागरिकों को भूमि, प्लॉट और फ्लैट के निबंधन की सुविधा उनके घर पर ही उपलब्ध कराई जाए। एआईजी (Assistant Inspector General) को भी यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि जरूरतमंद लोगों को समय पर यह सेवा मिल सके।
पेपरलेस निबंधन से राजस्व चोरी पर लगाम लगाने और प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। सचिव ने सभी एआईजी को हर सप्ताह कम से कम 10 निबंधन कार्यालयों का स्थल निरीक्षण कर मुख्यालय को रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। इसके अलावा, प्रमंडलीय मुख्यालय के अधीन आने वाले पांच-पांच निबंधन कार्यालयों में से प्रत्येक सप्ताह दो कार्यालयों का स्थल निरीक्षण करने का भी टास्क दिया गया है। मुख्यालय स्तर पर भी एक टीम गठित कर औचक निरीक्षण किए जाएंगे।
सेवा प्रदाताओं का पारिश्रमिक तय, GIS से होगा स्थल निरीक्षण
लाइसेंस प्राप्त सेवा प्रदाताओं को पेपरलेस निबंधन में आम लोगों की सहायता करने और प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। उनके लिए बैठने की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। दस्तावेज के मूल्य के आधार पर सेवा प्रदाताओं का पारिश्रमिक भी तय किया गया है:
दस्तावेज का मूल्य सेवा प्रदाता का पारिश्रमिक 1 लाख रुपये तक 1000 रुपये 5 लाख रुपये तक 2500 रुपये 5 लाख रुपये से अधिक 5000 रुपये यह पारिश्रमिक व्यवस्था सेवा प्रदाताओं को बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे आम नागरिकों को आसानी होगी।
निबंधन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और स्थल निरीक्षण को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए जीआईएस (GIS) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। सभी जिला निबंधन कार्यालयों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। विभाग का मानना है कि यह नई व्यवस्था न केवल प्रक्रिया को आसान बनाएगी, बल्कि आम लोगों के बीच फैल रही भ्रांतियों को भी दूर करेगी। जिन जिलों में पेपरलेस निबंधन की संख्या कम है, वहाँ प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए जिलाधिकारियों को भी पत्र भेजे जाएंगे।
रजिस्ट्री की प्रक्रिया में क्या-क्या बदलेगा?
बिहार में जमीन रजिस्ट्री अब पूरी तरह से आधुनिक और डिजिटल होने जा रही है। इस बदलाव से लोगों का समय बचेगा और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
- डीड तैयार करना ऑनलाइन होगा।
- स्टाम्प शुल्क का भुगतान डिजिटल माध्यम से होगा।
- बायोमेट्रिक सत्यापन भी ऑनलाइन ही किया जाएगा।
- दस्तावेजों पर डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा मिलेगी।
- रजिस्ट्री के बाद डिजिटल डीड की कॉपी वॉट्सएप या ई-मेल पर भेजी जाएगी।
17 अगस्त तक सभी 141 कार्यालयों में लागू होगी व्यवस्था
राज्य के कुल 141 निबंधन कार्यालयों में से 51 में पेपरलेस निबंधन की सुविधा पहले ही शुरू हो चुकी है। अब बाकी बचे 91 कार्यालयों में भी इसे पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य 17 अगस्त रखा गया है। मंगलवार को मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक महत्वपूर्ण बैठक की।
विभाग के सचिव नवीन कुमार ने बैठक में बताया, ‘राज्य के 51 निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस निबंधन की व्यवस्था शुरू की जा चुकी है। हमारा लक्ष्य है कि बाकी 91 कार्यालयों में भी 17 अगस्त तक यह प्रक्रिया पूरी तरह लागू हो जाए। इसके लिए अधिकारियों को लगातार निगरानी करने और लंबित काम को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है।’
इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। पहले चरण में 11 जुलाई को 10 कार्यालयों में पेपरलेस निबंधन शुरू हुआ था, जिसके बाद 30 जुलाई को दूसरे चरण में 40 और कार्यालयों को इस व्यवस्था से जोड़ा गया।
75 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को घर बैठे सुविधा
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा मानवीय पहलू यह है कि 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को अब निबंधन के लिए कार्यालय आने की जरूरत नहीं होगी। विभाग ने ऐसे लोगों के लिए घर पर ही भूमि, प्लॉट और फ्लैट के निबंधन की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सभी एआईजी (Assistant Inspector General) को भी यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को यह सेवा उनके घर पर ही मिले।
राजस्व चोरी रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
पेपरलेस निबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाने और राजस्व चोरी पर लगाम लगाने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। सचिव ने सभी एआईजी को हर सप्ताह कम से कम 10 निबंधन कार्यालयों का स्थल निरीक्षण करने और मुख्यालय को रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। प्रमंडलीय मुख्यालयों को भी अपने अधीन आने वाले पांच कार्यालयों में से प्रत्येक सप्ताह दो का निरीक्षण करना होगा। मुख्यालय स्तर पर भी एक टीम गठित कर औचक निरीक्षण किए जाएंगे।
सेवा प्रदाताओं को भी इस प्रक्रिया में अहम जिम्मेदारी मिली है। वे आम लोगों की सहायता करेंगे और प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। उन्हें बैठने की उचित सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनाने का भी निर्देश दिया गया है। उनके पारिश्रमिक को दस्तावेज के मूल्य के आधार पर तय किया गया है:
| दस्तावेज का मूल्य | सेवा प्रदाता का पारिश्रमिक |
|---|---|
| 1 लाख रुपये तक | 1000 रुपये |
| 5 लाख रुपये तक | 2500 रुपये |
| 5 लाख रुपये से अधिक | 5000 रुपये |
विभाग ने जीआईएस (Geographic Information System) तकनीक का उपयोग कर स्थल निरीक्षण को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की भी तैयारी की है।
भ्रांतियों को दूर करने और जागरूकता बढ़ाने का निर्देश
बैठक में पेपरलेस निबंधन को लेकर आम लोगों के बीच फैल रही भ्रांतियों को दूर करने पर भी विशेष जोर दिया गया। सचिव ने उन जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र लिखने का निर्देश दिया है जहां पेपरलेस निबंधन की संख्या अपेक्षित स्तर से कम है, ताकि प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। सेवा प्रदाताओं को भी लोगों को जागरूक करने और उनकी आशंकाओं को दूर करने की जिम्मेदारी दी गई है। विभाग का लक्ष्य है कि यह नई व्यवस्था सभी के लिए सुलभ और विश्वसनीय बन सके।








