Bihar MLC Election: आगामी बिहार विधान परिषद चुनाव से ठीक पहले राज्य की सियासत में एक नई हलचल मच गई है. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य सिंगापुर से पटना लौट आई हैं, जिसके बाद सियासी गलियारों में तेजस्वी यादव के लिए नई चुनौतियों की चर्चा तेज हो गई है. पटना एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए खुद लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती मौजूद थीं, लेकिन रोहिणी के बयानों में भाई तेजस्वी का जिक्र न होना कई सवाल खड़े कर गया है.
लालू प्रसाद यादव गाड़ी की अगली सीट पर बैठे नजर आए, जबकि रोहिणी आचार्य अपनी मां राबड़ी देवी और बहन मीसा भारती के साथ पीछे की सीट पर बैठी थीं. पटना पहुंचने के बाद रोहिणी आचार्य ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने अपने दौरे को पूरी तरह से निजी बताते हुए राजनीतिक कयासों को खारिज करने का प्रयास किया.
‘मैं सिर्फ अपने माता-पिता के बुलावे पर यहां आई हूं. मेरा यह दौरा पूरी तरह से निजी और गैर-राजनीतिक है.’
हालांकि, उनके इस बयान में तेजस्वी यादव का नाम न लेना राजनीतिक पंडितों के लिए हैरानी का सबब बन गया है. दरअसल, रोहिणी आचार्य अपनी बेबाक राय के लिए जानी जाती हैं और उन्हें राजनीतिक परिणामों की परवाह नहीं होती. पिछले विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने खुले तौर पर टिकट बंटवारे को लेकर तेजस्वी के फैसलों की आलोचना की थी, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आई थीं.
MLC चुनाव से पहले तेजस्वी की बढ़ी मुश्किलें
बिहार में 23 अक्टूबर को विधान परिषद की 8 सीटों के लिए मतदान होना है. इस महत्वपूर्ण चुनाव से ठीक पहले रोहिणी आचार्य का पटना आना, और उनके बयानों में तेजस्वी का उल्लेख न करना, राजद के लिए आंतरिक चुनौतियों को बढ़ा सकता है. विपक्षी गठबंधन एनडीए इस पारिवारिक मनमुटाव को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है. एनडीए के नेता पहले भी इस पर तंज कस चुके हैं.
‘जो व्यक्ति अपने परिवार का नहीं हो सका, वह बिहार का क्या होगा.’
अगर राजद के मौजूदा एमएलसी उम्मीदवारों की सूची से रोहिणी आचार्य सहमत नहीं हुईं, तो पार्टी के भीतर का असंतोष खुलकर सामने आ सकता है. यह स्थिति तेजस्वी यादव के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है, खासकर ऐसे समय में जब उन्हें एकजुटता की सबसे ज्यादा जरूरत है.
कांग्रेस ने भी बढ़ाई राजद की चुनौती
एक तरफ लालू परिवार के भीतर की यह सियासी हलचल है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी एमएलसी चुनाव में अपने अलग उम्मीदवार उतारकर राजद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. ऐसे में तेजस्वी यादव के सामने अब दोहरी राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है. उन्हें न सिर्फ परिवार के भीतर के असंतोष को संभालना होगा, बल्कि विपक्षी दलों और गठबंधन सहयोगी कांग्रेस की तरफ से मिल रही चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा.
हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मीसा भारती की मौजूदगी में रोहिणी और तेजस्वी के बीच सुलह की कोशिशें भी हो सकती हैं. अब देखना होगा कि मतदान से पहले लालू परिवार के भीतर क्या नए सियासी समीकरण बनते हैं और इसका बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ता है.







