spot_img

माफ करना बापू! पटना में गांधी के ऐतिहासिक शिविर की दुर्दशा देख चौंक जाएंगे आप

Bihar Gandhi Shiv: पटना के ऐतिहासिक गांधी शिविर की उपेक्षा देखकर हर कोई शर्मिंदा है। जिस स्थान पर महात्मा गांधी ने 65 दिन बिताए थे, वहां आज सीलन और टूटे शिलापट्ट सरकारी लापरवाही की कहानी कह रहे हैं।

spot_img
- Advertisement -

Bihar Gandhi Shiv: गांधी जयंती के अवसर पर पटना के ऐतिहासिक गांधी शिविर की बदहाली देखकर शायद हर कोई शर्मिंदा महसूस करेगा। आजादी के निर्णायक दौर में, जिस स्थान पर महात्मा गांधी ने बिहार में शांति और सामाजिक सद्भाव स्थापित करने के लिए लगभग 65 दिन बिताए थे, वह आज उपेक्षा और सरकारी लापरवाही का शिकार है। जिस कमरे में बापू रहा करते थे, वहां सीलन है और छत से पानी टपक रहा है, जो विरासत के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।

- Advertisement -

बापू के कमरे में सीलन, छत से टपकता पानी: उपेक्षा की कहानी

गांधी शिविर की वर्तमान स्थिति अत्यंत दयनीय है। महात्मा गांधी जिस कमरे में ठहरे थे, वहां की दीवारों पर सीलन साफ नजर आती है और छत से लगातार पानी टपक रहा है। मुख्य प्रवेश द्वार पर काई जम गई है, जो रखरखाव की कमी को स्पष्ट करती है। हैरानी की बात यह है कि दो साल पहले तक यहां कोई शिलापट्ट नहीं था, लेकिन अब दो शिलापट्ट ईंटों के सहारे लगाए गए हैं।

- Advertisement -

इनमें से एक शिलापट्ट पर गांधी शिविर संरचना का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 15 मई 2015 को किए जाने का उल्लेख है। वहीं, दूसरे शिलापट्ट पर जीर्णोद्धार कार्य का शुभारंभ 8 सितंबर 2026 दर्ज है, जो कि भविष्य की तारीख है और स्पष्ट रूप से एक त्रुटि प्रतीत होती है। हालांकि, अभिलेखों के अनुसार, जीर्णोद्धार का काम 8 सितंबर 2014 को शुरू हुआ था। जहां बापू बैठकर लोगों को संबोधित करते थे, वहां आज टूटी हुई पेड़ की टहनियां बिखरी पड़ी हैं।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  बिहार में बाढ़ से हाहाकार: हर साल करोड़ों खर्च, फिर भी क्यों उजड़ रहे आशियाने?| CM Samrat ने मांगी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सुपौल के लिए वायुसेना से मदद

आजादी के निर्णायक दौर का गवाह: गांधी का बिहार कनेक्शन

यह ऐतिहासिक भवन तत्कालीन समय में डॉ. सैयद महमूद का आवास था। महात्मा गांधी यहां दो चरणों में ठहरे थे। पहली बार वे 5 मार्च 1947 से 30 मार्च 1947 तक रहे, और दूसरी बार 14 अप्रैल 1947 से 24 मई 1947 तक। इन महत्वपूर्ण दिनों में, यह स्थान बिहार की तत्कालीन परिस्थितियों पर गहन विमर्श, शांति प्रयासों और व्यापक जनसंपर्क का केंद्र बना रहा।

यह भी पढ़ें:  Owaisi UP Alliance यूपी में भाजपा को रोकने के लिए ओवैसी का बड़ा दांव! सपा, बसपा, कांग्रेस किसी से भी हाथ मिलाने को तैयार?

गांधी जी अपने सहयोगियों निर्मल कुमार बोस, मनु गांधी, सैयद अहमद, देव प्रकाश नायर और सैयद मुज्तबा के साथ यहां रुके थे। खान अब्दुल गफ्फार खां भी पटना आकर गांधी जी के साथ इसी स्थान पर ठहरे थे। बापू ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद और डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह सहित बिहार के कई प्रमुख नेताओं से मुलाकात कर उस समय की स्थिति की जानकारी ली थी और गांव-गांव जाकर शांति का संदेश दिया था।

जीर्णोद्धार पर करोड़ों खर्च, फिर भी बदहाली क्यों?

गांधी शिविर की ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए, बिहार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के तहत बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड ने इसके जीर्णोद्धार की योजना बनाई थी। अभिलेखों के अनुसार, 8 सितंबर 2014 को गांधी संग्रहालय के सचिव रजी अहमद ने गांधी शिविर संरचना के जीर्णोद्धार कार्य का शुभारंभ किया था। इस मौके पर कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के तत्कालीन सचिव चंचल कुमार भी मौजूद थे।

यह भी पढ़ें:  दरभंगा में अब हर स्कूल-कॉलेज में मिलेगी 'पुलिस दीदी' की मदद! जानें क्या है खास | सुरक्षा का नया चेहरा - सहायता और विश्वास| देखें तस्वीरें Live

योजना के तहत काम पूरा होने के बाद, 15 मई 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गांधी शिविर संरचना का उद्घाटन किया। उस समय भवन निर्माण विभाग के मंत्री दामोदर रावत और कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री राम लषण राम रमण भी उपस्थित थे। उद्घाटन को एक दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज भी यह स्थल उपेक्षा का शिकार है।

माफ करना बापू, हम शर्मिंदा हैं! गांधी जयंती पर पटना के उस ऐतिहासिक गांधी शिविर को देखकर शायद यही शब्द निकलते हैं, जहां महात्मा गांधी ने आजादी के निर्णायक दौर में बिहार में शांति और सामाजिक सद्भाव कायम करने के लिए करीब 65 दिन बिताये थे।

गांधी शिविर अनुग्रह नारायण सिन्हा सामाजिक अध्ययन शोध संस्थान के तहत आता है। सरकारी स्तर पर जीर्णोद्धार और उद्घाटन हुए एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस धरोहर को गांधी जी की स्मृति से जोड़कर संरक्षित किया गया था, उसके नियमित रखरखाव और संरक्षण की जिम्मेदारी कितनी गंभीरता से निभाई जा रही है। इस ऐतिहासिक स्थल की बदहाली को दूर करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि यह भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहे।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

बिहार में ट्रेनों पर बड़ा संकट! त्योहारों से पहले 36 दिन रद्द रहेगी जसीडीह-झाझा मेमू

Bihar Train Cancelled: बिहार में त्योहारों से पहले बड़ा झटका! 4 अक्टूबर से 27 दिसंबर तक मधुपुर-जसीडीह रेलखंड पर ट्रैक मेंटेनेंस के कारण जसीडीह-झाझा मेमू समेत कई ट्रेनें रद्द और रीशेड् #BiharTrain,#TrainCancelled,#FestivalTravel

लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने पटना लौटते ही बढ़ाई तेजस्वी की टेंशन! नाम तक नहीं लिया, अब क्या होगा?

Bihar MLC Election: लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के पटना लौटने के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है. MLC चुनाव से पहले तेजस्वी यादव के लिए नई चुनौती खड़ी हो गई है क्योंकि रोहिणी न #BiharMLCElection,#RohiniAcharya,#TejashwiYadav

Bijnor HIV News एक महिला और उसके चाहने वाले अनेक ! दो चचेरे भाई भी शारीरिक संबंध बनाकर फंसे| एक की मौत – ...

Bijnor HIV News: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक बेहद खौफनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। यहां एक महिला पर कई लोगों से शारीरिक संबंध बनाकर उन्ह #BijnorNews,#HIVInfection,#UttarPradesh

ममता बनर्जी को कांग्रेस का न्यौता – शर्त भी : ‘बैगेज’ छोड़ो और पार्टी में लौट आओ – अपना ‘ सामान ‘ मत लाना

Adhir Ranjan Chowdhury: कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी को कांग्रेस में लौटने का न्योता दिया है, लेकिन एक शर्त के साथ। उन्होंने ममता से 'सामान' (अभिषेक बनर्जी) छोड़ने को क #AdhirRanjanChowdhury,#MamataBanerjee,#INDIAlliance