Bihar Panchayat Fund: बिहार में पंचायती राज संस्थाओं को मिलने वाले अरबों रुपये के फंड का प्रबंधन अब पूरी तरह से बदलने वाला है. बिहार सरकार एक ऐसी नई व्यवस्था शुरू करने जा रही है, जिससे ग्राम पंचायतों, ब्लॉक और जिला परिषदों के खातों में आने वाली हर राशि की डिजिटल मॉनिटरिंग संभव होगी. इस कदम का मुख्य उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना और फंड के दुरुपयोग को रोकना है.
पंचायती राज विभाग ने इस पूरे फंड मैनेजमेंट सिस्टम को संभालने के लिए बैंकिंग पार्टनर चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके तहत एक या एक से अधिक शिड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों को चुना जाएगा, जो इस मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम को तैयार करने और संचालित करने में मदद करेंगे.






पटना से एक क्लिक पर दिखेगा पंचायतों का पूरा हिसाब-किताब
इस नई हाईटेक व्यवस्था के केंद्र में एक सेंट्रलाइज्ड वेब-बेस्ड डैशबोर्ड होगा, जो राज्य स्तर से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक काम करेगा. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पटना में बैठे अधिकारी भी अब एक क्लिक पर यह देख सकेंगे कि किस जिला परिषद, ब्लॉक या ग्राम पंचायत को कितना फंड मिला है. इसके साथ ही, कितना फंड खर्च हुआ है और कौन से ट्रांजैक्शंस अभी पेंडिंग हैं, इसकी भी रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध होगी.

फंड के दुरुपयोग पर लगेगी लगाम, मजबूत होगी तकनीकी सुरक्षा
फंड के किसी भी संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए विभाग ने सख्त तकनीकी सुरक्षा उपाय किए हैं. डिजिटल पेमेंट के लिए ‘मेकर-चेकर अप्रूवल वर्कफ्लो’ अनिवार्य होगा. इसका मतलब है कि बिना निर्धारित स्तर की मंजूरी के कोई भी भुगतान नहीं किया जा सकेगा, जिससे जवाबदेही तय होगी.
बैंकों के इस सिस्टम को सुरक्षित एपीआई के जरिए सरकारी ट्रेजरी, पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) और केंद्र सरकार के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से सीधे लिंक किया जाएगा. यह एकीकरण यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट भेजने और ऑडिट करने में होने वाली लेटलतीफी को पूरी तरह खत्म कर देगा.
पंचायती राज विभाग ने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EoI) जारी किया है. शॉर्टलिस्ट होने वाले बैंकों का मूल्यांकन उनकी तकनीकी क्षमता, राज्यव्यापी नेटवर्क और तकनीकी टीम की उपलब्धता के आधार पर 100 अंकों के पैमाने पर किया जाएगा.
बैंकिंग पार्टनर चुनने की प्रक्रिया तेज, 22 जुलाई तक प्रस्ताव जमा करने का मौका
विभाग ने इच्छुक बैंकों को 22 जुलाई की शाम तक पंचायती राज विभाग के संयुक्त सचिव सह नोडल पदाधिकारी के कार्यालय में अपना प्रस्ताव जमा करने को कहा है. इस पहल से न सिर्फ बिहार में पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन में क्रांति आएगी, बल्कि आम जनता के पैसे का सही इस्तेमाल भी सुनिश्चित हो सकेगा.









