Jehanabad Vigilance Action: भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। जहानाबाद जिले के रतनी फरीदपुर प्रखंड की पंडौल पंचायत के मुखिया नंदकिशोर राम को 12 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई शनिवार को की गई, जिससे जिले के पंचायत प्रतिनिधियों और सरकारी तंत्र में हड़कंप मच गया है।
मुखिया नंदकिशोर राम पर मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्य के भुगतान के लिए कमीशन मांगने का गंभीर आरोप था। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की इस ‘जहानाबाद विजिलेंस एक्शन’ से साफ है कि भ्रष्टाचार पर लगातार नकेल कसी जा रही है।






मनरेगा भुगतान के लिए मांगी थी रिश्वत
पोखमा निवासी प्रमोद कुमार ने आरोप लगाया था कि मनरेगा के तहत किए गए अपने काम के भुगतान के लिए मुखिया उनसे लगातार 12 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे थे। बार-बार पैसे की मांग से परेशान होकर प्रमोद कुमार ने 23 जुलाई को पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलते ही निगरानी विभाग की टीम सक्रिय हो गई। उन्होंने 24 और 25 जुलाई को जहानाबाद पहुंचकर मामले का सत्यापन किया। जांच में प्रमोद कुमार की शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद विभाग ने मुखिया को रंगे हाथ पकड़ने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया।
नेहालपुर मोड़ पर हुई गिरफ्तारी
शनिवार को निगरानी टीम ने पहले से तय रणनीति के तहत रतनी के नेहालपुर मोड़ के पास जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता प्रमोद कुमार ने मुखिया नंदकिशोर राम को 12 हजार रुपये दिए, निगरानी टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें रिश्वत लेते हुए दबोच लिया।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया, ‘मुखिया नंदकिशोर राम को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है। उन्हें पूछताछ के लिए पटना लाया गया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।’
गिरफ्तारी के बाद आरोपी मुखिया को पूछताछ के लिए पटना ले जाया गया है। इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि सरकारी योजनाओं में होने वाले भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, खासकर मनरेगा जैसी जनहितकारी योजनाओं में। निगरानी विभाग की जांच जारी है और इसमें और भी खुलासे होने की उम्मीद है।








