Bihar Corruption: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का सीधा असर दिखा है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र पासवान ने शनिवार को जन सुनवाई के दौरान रिश्वतखोरी का एक चौंकाने वाला मामला पकड़ा। सीतामढ़ी में एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम के तहत मिलने वाली अनुदान राशि के लिए एक डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा 50 हजार रुपये की मांग करने का खुलासा हुआ। मंत्री ने मौके पर ही तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया।







जन सुनवाई में हुआ रिश्वतखोरी का खुलासा
सीतामढ़ी के कमलेश पासवान नाम के एक फरियादी ने मंत्री लखेंद्र पासवान से शिकायत की। उन्होंने बताया कि विभाग का एक डाटा एंट्री ऑपरेटर एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम के तहत मिलने वाली अनुदान राशि जारी करने के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। कमलेश ने आरोप लगाया कि रिश्वत दिए बिना उनका काम नहीं किया जा रहा है।
शिकायत सुनते ही मंत्री ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने कमलेश से कहा कि वह तुरंत संबंधित कर्मचारी को फोन लगाएं, ताकि सच्चाई का पता चल सके।
‘मेरे सामने उसने 50 हजार रुपये मांगे, 1 घंटे में सस्पेंड करो’
मंत्री के सामने ही कमलेश पासवान ने डाटा एंट्री ऑपरेटर चंदन कुमार को फोन किया। आरोप है कि फोन पर बातचीत के दौरान चंदन ने फिर से 50 हजार रुपये की मांग दोहराई। यह सुनकर वहां मौजूद सभी अधिकारी और लोग हैरान रह गए। इसके तुरंत बाद मंत्री ने सख्त एक्शन लेते हुए निलंबन का निर्देश दिया।
जिला कल्याण पदाधिकारी को तत्काल निर्देश
फोन पर रिश्वत की मांग सामने आने के बाद मंत्री लखेंद्र पासवान ने सीतामढ़ी के जिला कल्याण पदाधिकारी (डीडब्ल्यूओ) से संपर्क किया। उन्होंने चंदन कुमार के बारे में जानकारी ली, जिस पर अधिकारी ने बताया कि वह विभाग में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि एससी-एसटी केस संख्या 129/26 में अनुदान राशि दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगी जा रही थी। उन्होंने आरोपी कर्मचारी को तत्काल निलंबित करने का निर्देश दिया।
मंत्री ने डीडब्ल्यूओ को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि एक घंटे के भीतर आरोपी कर्मचारी पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति
मंत्री लखेंद्र पासवान ने इस घटना के बाद कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने दोहराया कि किसी भी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय है।
इस मामले के सामने आने के बाद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने तुरंत जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने फरियादी कमलेश पासवान को भरोसा दिलाया कि यदि वह योजना का पात्र लाभुक है, तो उसे बिना किसी बाधा के नियमानुसार अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाएगी।









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