Bihar STF: बिहार में बड़े भू-माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार एसटीएफ ने पटना और नालंदा जिले के कुख्यात अपराधी संजय कुमार उर्फ संतोष कुमार उर्फ संतोष डॉन को गिरफ्तार कर लिया है। बिहार पुलिस की इस सफलता को एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। गिरफ्तारी के बाद, संतोष डॉन को पटना के खुसरूपुर थाने को सौंप दिया गया है।
कुख्यात संतोष डॉन पर पटना, नालंदा और आर्थिक अपराध इकाई में 02 दर्जन से भी अधिक जघन्य अपराध के मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या का प्रयास, रंगदारी, रंगदारी के लिए हत्या और भू-माफिया से जुड़े विभिन्न संगीन आरोप शामिल हैं। हाल ही में, आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने भी उसके ठिकानों पर छापेमारी की थी।






बिहार STF ने दबोचा ‘संतोष डॉन’! इस कुख्यात भू-माफिया पर हैं 2 दर्जन से ज्यादा केस, पढ़िए पूरा मामला
Santosh Don Arrest: बिहार के सबसे बड़े भू-माफियाओं में शुमार पटना और नालंदा जिले के कुख्यात अपराधी संजय कुमार उर्फ संतोष कुमार उर्फ संतोष डॉन को आखिरकार बिहार एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। बिहार पुलिस के लिए यह एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है, जिससे अपराध जगत में हड़कंप मच गया है। गिरफ्तारी के बाद कुख्यात संतोष डॉन को खुसरूपुर थाने को सौंप दिया गया है, जहां उसके खिलाफ सबसे ज्यादा मामले दर्ज हैं।

संतोष डॉन पर दो दर्जन से अधिक संगीन मामले
कुख्यात संतोष डॉन पर पटना, नालंदा और आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) में लगभग दो दर्जन से अधिक जघन्य अपराध के मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या का प्रयास, रंगदारी, रंगदारी के लिए हत्या और भू-माफिया जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। उसके आतंक से कई गरीब किसान और कारोबारी त्रस्त थे। एसटीएफ की यह कार्रवाई ऐसे अपराधियों पर नकेल कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संतोष डॉन के खिलाफ हत्या का प्रयास, रंगदारी, रंगदारी के लिए हत्या और भू-माफिया जैसे दो दर्जन से अधिक जघन्य अपराध के कांड दर्ज हैं।
2015 में जरायम की दुनिया में रखा कदम, ईओयू ने भी की थी छापेमारी
संतोष डॉन ने साल 2015 में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। तभी से वह जमीन कब्जाने और रंगदारी वसूलने में सक्रिय था। इस साल जून के महीने में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने भी संतोष डॉन के पटना के खुसरूपुर, नालंदा और मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। दर्जनों वाहनों के काफिले के साथ ईओयू ने 25 ठिकानों पर दबिश दी थी, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया था।
अकूत संपत्ति और बेनामी प्रॉपर्टी का खुलासा
ईओयू की जांच टीम ने संतोष डॉन के पैतृक गांव रहुई प्रखंड के खिदरचक और पचासा समेत उसके सभी आलीशान घरों और अन्य व्यावसायिक परिसरों की गहन तलाशी ली थी। छापेमारी के दौरान, यह भी सामने आया कि उसने अपने ही गांव में कई घरों पर कब्जा कर लिया था और रिश्तेदारों के नाम पर अकूत संपत्ति अर्जित की थी। ईओयू की टीम ने खुसरूपुर के पचरुखिया, जगमालबीघा, सुकरबेगचक, मुस्तफापुर और चौड़ा समेत कई स्थानों पर उसकी बेनामी प्रॉपर्टी को खंगाला था, जिसमें बड़ी संख्या में चल-अचल संपत्ति का पता चला था। इस गिरफ्तारी से बिहार में संगठित अपराध और भू-माफियाओं पर नकेल कसने में मदद मिलेगी।
अपराधी का इतिहास और EOU की पिछली कार्रवाई
संतोष डॉन ने साल 2015 में जरायम की दुनिया में कदम रखा था। इसी साल जून के महीने में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने संतोष डॉन के पटना के खुसरूपुर, नालंदा और मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों में बड़े पैमाने पर दबिश दी थी। दर्जनों वाहनों के काफिले के साथ ईओयू ने 25 ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया था, जिससे हड़कंप मच गया था।
जांच टीम ने संतोष डॉन के पैतृक गांव रहुई प्रखंड के खिदरचक और पचासा समेत उसके सभी आलीशान घरों और अन्य व्यावसायिक परिसरों की गहन तलाशी ली थी। संतोष डॉन के रसूख के बारे में कहा जाता है कि उसके इलाके में उसका काफी प्रभाव है। उस पर काफी समय से गरीब किसानों की जमीन कब्जाने, फर्जी कागजात तैयार कर सरकारी और निजी भूमि हड़पने तथा कारोबारियों से मोटी रकम बतौर रंगदारी वसूलने के केस दर्ज हैं। इसके अलावा, लोगों को सरेआम धमकाने और गोलीबारी करने के मामलों में भी संतोष डॉन वांछित रहा है।
किन-किन थानों में दर्ज हैं मामले?
संतोष डॉन के खिलाफ सबसे अधिक मामले पटना जिले के खुसरूपुर थाने में दर्ज हैं। इसके अलावा, फतुहा, नालंदा के भगवान बिगहा और सोहसराय थानों में भी उस पर कई गंभीर केस दर्ज हैं। इन मामलों में आर्म्स ऐक्ट, जानलेवा हमला और जमीन कब्जाने जैसे आरोप शामिल हैं।
यह भी कहा जाता है कि उसने अपने रिश्तेदारों के नाम पर भी अकूत संपत्ति अर्जित की है। उसने अपने ही गांव में कई घरों पर भी कब्जा कर लिया। पिछली छापेमारी के दौरान, ईओयू की टीम ने खुसरूपुर के पचरुखिया, जगमालबीघा, सुकरबेगचक, मुस्तफापुर और चौड़ा समेत कई स्थानों पर उसकी बेनामी प्रॉपर्टी को बारीकी से खंगाला था। उस छापेमारी में बड़ी संख्या में चल-अचल संपत्ति का पता चला था। इस गिरफ्तारी से पटना और नालंदा के लोगों ने राहत की सांस ली है और उम्मीद है कि भू-माफियाओं के खिलाफ ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।









