Bihar Weather Alert: डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा और भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बिहार के लिए महत्वपूर्ण मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। बुलेटिन संख्या-47 के अनुसार, 28-29 जून 2026 के आसपास उत्तर बिहार के कई जिलों में भारी बारिश के साथ मेघगर्जन और वज्रपात की आशंका है। किसानों और आम लोगों को बदलते मौसम के मिजाज को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
जारी पूर्वानुमान के मुताबिक, 24 से 28 जून 2026 तक उत्तर बिहार के अधिकांश स्थानों पर मौसम आमतौर पर शुष्क रहेगा, हालांकि कहीं-कहीं हल्की-फुल्की बारिश हो सकती है। लेकिन, 28-29 जून के करीब बेगूसराय, समस्तीपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चम्पारण और पश्चिमी चम्पारण जिलों में अच्छी बारिश होने का अनुमान है, जो मेघगर्जन और वज्रपात के साथ होगी। इस दौरान आकाश में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने की संभावना है।






इन जिलों में तापमान 40 डिग्री तक, फिर मिलेगी राहत
मौसम विभाग ने बताया कि पूर्वानुमान अवधि में औसत अधिकतम तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। सिवान, गोपालगंज और बेगूसराय जैसे कुछ जिलों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, मधुबनी और सीतामढ़ी जिलों में बारिश की वजह से तापमान में थोड़ी कमी महसूस की जा सकती है। न्यूनतम तापमान 24 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। सुबह की सापेक्षिक आर्द्रता 75-80 प्रतिशत और दोपहर की 25-30 प्रतिशत रहने की संभावना है। हवा मुख्यतः पूर्वी दिशा से 12 से 18 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलेगी।
“विगत तीन दिनों का आकलन बताता है कि पूसा में औसत अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24.9 डिग्री सेल्सियस रहा। आज का अधिकतम तापमान 39.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.8 डिग्री सेल्सियस अधिक था। न्यूनतम तापमान 24.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.1 डिग्री सेल्सियस कम है।”
– डॉ० ए. सत्तार, वरीय वैज्ञानिक सह नोडल पदाधिकारी
किसानों के लिए विशेष कृषि सलाह
वर्तमान कमजोर मानसूनी परिस्थितियों और आगामी वर्षा को देखते हुए किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए गए हैं:
- धान की खेती: ऊँचास जमीन में खरीफ धान की बीजस्थली तैयार करने का काम फिलहाल रोक दें। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे निचली भूमि में राजेन्द्र नीलम, राजेन्द्र भगवती, राजेन्द्र सरस्वती और राजेन्द्र श्वेता जैसी मध्यम अवधि वाली धान की किस्मों का बिचड़ा गिराने और नर्सरी तैयार करने का काम जारी रख सकते हैं। बीजस्थली में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए जीवनरक्षक सिंचाई अवश्य करें।
- सब्जी की बुआई: सिंचाई सुविधा वाले किसान ऊँचास जमीन में भिंडी, कहू, खीरा, नेनुआ और लौकी जैसी सब्जियों की बुआई कर सकते हैं।
- वैकल्पिक फसलें: कमजोर मानसूनी परिस्थितियों को देखते हुए, ऊँचास जमीन में धान के बजाय अरहर (राजेन्द्र अरहर-1) और उड़द जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाएं।
- खरीफ मक्का: शक्तिमान-2, शक्तिमान 5, शक्तिमान 6 और राजेन्द्र शंकर मक्का-3 किस्मों की बुआई का कार्य शीघ्र पूरा करें। अंतिम जुताई के समय प्रति हेक्टेयर 100-150 क्विंटल अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ 30 किलोग्राम नत्रजन, 60 किलोग्राम स्फुर और 50 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग करें।
- प्याज की नर्सरी: खरीफ प्याज की नर्सरी तैयार करें। एग्री फाउंड डार्क रेड (एडीआर), एन-53, भीमा सुपर और अर्का कल्याण किस्मों के गुणवत्तायुक्त बीजों की व्यवस्था करें। एडीआर की नर्सरी ऊँची क्यारियों पर तैयार करें और अधिक वर्षा से बचाव के लिए 1.5 मीटर ऊँचाई पर पॉलीथीन आवरण की व्यवस्था करें।
- गन्ना: शरदकालीन गन्ने में नत्रजन की शेष मात्रा का प्रयोग कर मिट्टी चढ़ाएं। वसंतकालीन गन्ने में निराई-गुड़ाई और उपरिवेशन का कार्य करें।
- लीची बागान: फल तुड़ाई के बाद बागानों में छंटाई और साफ-सफाई करें। गिरे हुए पत्तों और सूखी टहनियों को हटाकर नष्ट करें, जिससे कीट और रोगों का प्रकोप कम हो सके।
- पशुधन: दुधारू पशुओं में संक्रामक रोगों से बचाव के लिए पशु चिकित्सकों के निर्देशानुसार रोग निरोधक उपाय अपनाएं। मेघगर्जन और वज्रपात के समय पशुओं को खुले में न रखें।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेत में खड़ी फसलों में नमी बनाए रखने के लिए आवश्यकतानुसार जीवनरक्षक सिंचाई करें, क्योंकि वर्तमान में उच्च तापमान और अल्प वर्षा की स्थिति बनी हुई है। आगामी दिनों में मौसम में होने वाले बदलावों के प्रति सचेत रहें और कृषि कार्यों में सावधानी बरतें।








