Bihar Women Employment: मंगलवार को बिहार में आयोजित जीविका से जुड़ी योजनाओं के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिलाओं के रोजगार को लेकर सरकार के बड़े लक्ष्य की घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य में एक करोड़ महिलाओं को नौकरी या रोजगार से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जीविका सुधा बिक्री केंद्रों के आवंटन पत्र वितरित किए और महिलाओं द्वारा संचालित पशु औषधि केंद्र के साथ-साथ सुख-सखी प्रशिक्षण शिविर का भी शुभारंभ किया।
रक्षाबंधन के पूर्व कार्यक्रम के अवसर पर मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद सभागार में कॉम्फेड, स्वास्थ्य विभाग के “अनीमिया मुक्त बिहार” विशेष अभियान, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग तथा समाज कल्याण विभाग से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों को संबोधित किया।
इस अवसर पर अपनी बहनों से राखी बंधवाकर उनके स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद को प्राप्त किया। बहनों की सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तीकरण के प्रति हमारी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
“अनीमिया मुक्त बिहार” विशेष अभियान 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चलेगा। इसके तहत एनीमिया की रोकथाम, जांच, उपचार एवं जागरूकता को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जाएगा। लगभग 1 करोड़ 20 लाख 82 हजार 500 लाभार्थियों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए “सुधा सखी” एवं महिला संचालित पशु औषधि केंद्र जैसी पहल शुरू की गई हैं। अगले तीन वर्षों में बिहार की 1 करोड़ महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य है।
हमारा संकल्प है कि बिहार की बहनों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और बेहतर स्वास्थ्य की सशक्त भागीदार बनाया जाए।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मिथिला हस्तकला कोऑपरेटिव सोसाइटी की घोषणा की और इसके नवनियुक्त अध्यक्ष व सदस्यों को प्रमाण पत्र सौंपे। मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र महिला सशक्तिकरण रहा। मुख्यमंत्री ने जीविका दीदियों से सीधा संवाद किया और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए रोजगार व स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया।
सम्राट चौधरी ने कहा, “बिहार सरकार अब तक 12 लाख लोगों को नौकरी दे चुकी है। हमारा लक्ष्य आगे एक करोड़ लोगों को नौकरी या रोजगार उपलब्ध कराना है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर है। एक करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।”
सरकार का मानना है कि महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता राज्य के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
जीविका सुधा का विस्तार और नई पहलें
कार्यक्रम में जीविका सुधा के विस्तार पर भी गहन चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि जीविका सुधा को बड़े स्तर पर आगे ले जाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए कारोबार और आय के नए अवसर सृजित करना है। जीविका के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को समूहों से जोड़कर विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा गया है। अब सरकार इन गतिविधियों का दायरा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
- जीविका सुधा बिक्री केंद्र: महिला समूहों के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए इन केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है।
- पशु औषधि केंद्र: महिलाओं द्वारा संचालित इन केंद्रों की शुरुआत से स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलेंगे।
- सुख-सखी प्रशिक्षण शिविर: यह शिविर महिलाओं को कौशल विकास और स्थानीय स्तर पर काम के अवसर प्रदान करेगा।
- मिथिला हस्तकला कोऑपरेटिव सोसाइटी: इस पहल से मिथिला की पारंपरिक हस्तकला को संगठित तरीके से बढ़ावा मिलेगा और कारीगरों को लाभ होगा।
मुख्यमंत्री का संवाद और भविष्य की योजनाएं
कार्यक्रम के दौरान जीविका दीदियों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को राखी बांधी और उनसे अपनी उपलब्धियां साझा कीं। मुख्यमंत्री ने जीविका से जुड़ी महिलाओं के आत्मनिर्भरता की दिशा में किए गए महत्वपूर्ण कार्यों की सराहना की। उन्होंने जीविका सुधा को आगे बढ़ाने और इसे विश्व स्तर तक ले जाने की दिशा में काम करने की बात कही। सरकार का जोर केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, स्वरोजगार और बाजार से जुड़ने के अवसर बढ़ाना भी इसके दायरे में है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बृजेंद्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और समाज कल्याण मंत्री रेखा गुप्ता सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में मां सीता मंदिर से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार 31 दिसंबर के बाद मंदिर में पूजा शुरू कराने की दिशा में काम कर रही है। बिहार में महिला स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियां लंबे समय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग रही हैं, और सरकार अब इनके जरिए रोजगार के अवसरों को और बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
जीविका सुधा बिक्री केंद्र, पशु औषधि केंद्र, प्रशिक्षण कार्यक्रम और हस्तकला से जुड़ी पहलें इसी व्यापक योजना का हिस्सा हैं, जो महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। इन प्रयासों से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।








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