Bihar High Court: पटना हाई कोर्ट में सरकारी वकीलों की नई नियुक्तियों का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। बिहार सरकार ने इन पदों पर जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का संकेत दिया है, जिसमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का ऐतिहासिक प्रावधान भी किया जाएगा। यह कदम राज्य के न्यायिक तंत्र में पारदर्शिता और समावेशिता लाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
दरअसल, पटना हाई कोर्ट में कार्यरत राज्य सरकार के सभी विधि पदाधिकारियों ने स्वेच्छा से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इनमें अपर महाधिवक्ता, राजकीय अधिवक्ता, सरकारी अधिवक्ता और स्थायी समापुदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल थे। इन सामूहिक इस्तीफों के बाद, राज्य सरकार के लिए नए सिरे से नियुक्तियां करने का मार्ग खुल गया है।






सरकारी वकीलों की भर्ती में महिलाओं को मिलेगा बड़ा मौका
अब बिहार सरकार पटना हाई कोर्ट में विधि पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाएगी। इस नई भर्ती में सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण फैसला यह है कि इन नियुक्तियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी, जिससे न्यायिक क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। यह फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पारदर्शी प्रक्रिया से होगी सभी पदों पर नियुक्ति
राज्य सरकार का कहना है कि नई नियुक्तियां पूरी तरह से योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर होंगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी तरह की धांधली या पक्षपात न हो। पूर्व में कार्यरत सभी सरकारी वकीलों के इस्तीफे के बाद, यह एक अवसर है कि नई ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ योग्य विधि पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाए।
न्यायिक व्यवस्था में बढ़ेगी दक्षता और प्रतिनिधित्व
इस पहल से न केवल पटना हाई कोर्ट में सरकारी वकीलों की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा, बल्कि न्यायिक व्यवस्था में विभिन्न सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने से न्यायिक प्रक्रिया में उनकी आवाज और दृष्टिकोण को महत्व मिलेगा, जो न्याय प्रणाली को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाएगा। राज्य सरकार जल्द ही इन पदों पर भर्ती के लिए विस्तृत अधिसूचना जारी कर सकती है।








