Patna High Court: बिहार की राजधानी पटना में स्थित हाईकोर्ट को जल्द ही नया मुख्य न्यायाधीश मिलने वाला है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। कॉलेजियम की बैठक 6 अगस्त, 2026 को हुई थी, जिसमें जस्टिस राव के साथ-साथ तीन अन्य उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।
कौन हैं जस्टिस वी. कामेश्वर राव?
जस्टिस वी. कामेश्वर राव का जन्म 7 अगस्त, 1965 को हुआ था। उन्होंने 1987 में दिल्ली विश्वविद्यालय से भूगोल में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की और 1990 में एल.एल.बी. पूरी की। मार्च 1991 में उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल में एक वकील के तौर पर पंजीकरण कराया। अपने कानूनी करियर की शुरुआत में, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की प्रधान पीठ में वकालत की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट और पोर्ट ब्लेयर स्थित कलकत्ता हाईकोर्ट की सर्किट बेंच में भी अपनी सेवाएं दीं।






जस्टिस राव को सेवा और श्रम संबंधी मामलों, मध्यस्थता, संवैधानिक कानून और प्रशासनिक कानून में विशेष विशेषज्ञता हासिल है। उन्होंने विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों और स्वायत्त निकायों का भी प्रतिनिधित्व किया है।
न्यायिक करियर का सफर और पटना हाईकोर्ट की कमान
जनवरी 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने जस्टिस राव को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया था। 17 अप्रैल, 2013 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 18 मार्च, 2015 को वे स्थायी न्यायाधीश बन गए। जून 2025 में, जस्टिस राव को कर्नाटक हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया, जहां उन्होंने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। जुलाई 2025 में वे पुनः दिल्ली हाईकोर्ट लौट आए।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद, जस्टिस वी. कामेश्वर राव अब पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभालने के लिए तैयार हैं, हालांकि औपचारिक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होना अभी बाकी है।
जस्टिस राव की नियुक्ति से पटना हाईकोर्ट में न्यायिक प्रक्रिया को नई गति मिलने की उम्मीद है। औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे अपना पदभार ग्रहण करेंगे और राज्य की न्याय व्यवस्था में अहम भूमिका निभाएंगे। यह सिफारिश पटना हाईकोर्ट के नेतृत्व में बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।








