Bihar Education Reform: पटना: बिहार की शिक्षा व्यवस्था में अब बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दो दिवसीय राज्य स्तरीय चिंतन शिविर में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इनमें स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, परीक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करने और छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने जैसे बड़े फैसले शामिल हैं। इन निर्णयों से राज्य के लाखों छात्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।







गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बनेगी विशेष समिति
शिक्षा विभाग द्वारा पटना के अधिवेशन भवन में आयोजित कार्यशाला-सह-चिंतन शिविर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि शिक्षा ही समाज को सही दिशा देती है। सरकार का मुख्य लक्ष्य बिहार के हर स्कूल में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई सुनिश्चित करना है। इसके लिए एक राज्य स्तरीय विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए ठोस उपाय सुझाएगी। सरकार का विजन है कि हर स्कूल उत्कृष्टता का केंद्र बने, जहां बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।

परीक्षा व्यवस्था में AI की एंट्री, पेपर लीक पर ‘गुंडा एक्ट’
बिहार सरकार ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं। राज्य स्तरीय परीक्षा सुधार समिति का गठन किया जाएगा, जो बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ कक्षा स्तर पर होने वाले मूल्यांकन की भी समीक्षा करेगी। अब सिर्फ रटने की क्षमता नहीं, बल्कि छात्रों की समझ, विश्लेषण क्षमता और विषय पर पकड़ का भी आकलन होगा। इसके लिए तकनीक और AI का इस्तेमाल करने के सुझाव दिए गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पेपर लीक के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था को ‘लीकेज प्रूफ’ बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कहा, “परीक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। पेपर लीक करने वालों के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई और सजा की व्यवस्था की जाएगी।”
उन्होंने जोर दिया कि पेपर लीक का सबसे बड़ा नुकसान उन मेहनती छात्रों को होता है, जो वर्षों तक तैयारी करते हैं। सरकार अब परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक का भरपूर उपयोग करेगी।
छात्रों की समस्या 30 दिन में सुलझेगी, नहीं तो मुख्यमंत्री करेंगे सुनवाई
छात्रों को अपनी समस्याओं के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े, इसके लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने की घोषणा की है। इस पोर्टल पर विद्यार्थी स्कूल, कॉलेज, परीक्षा, शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन से जुड़ी अपनी शिकायतें और सुझाव सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे। सरकार ने दावा किया है कि इस पोर्टल का मकसद छात्रों को राहत देना है। सबसे खास बात यह है कि दर्ज की गई शिकायत सिर्फ दर्ज होकर नहीं रह जाएगी, बल्कि उसके समाधान की नियमित निगरानी की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने शिकायतों के समाधान के लिए 30 दिनों की समयसीमा भी तय की है। यदि किसी छात्र की शिकायत का समाधान इस अवधि में नहीं होता है, तो उसे सीधे मुख्यमंत्री स्तर पर लाया जाएगा। इसके लिए महीने में एक बार अलग से सहयोग शिविर आयोजित किया जाएगा, जहां उन मामलों की समीक्षा होगी जिनका समाधान तय समयसीमा में नहीं हो पाया। इस व्यवस्था से अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
जमीन पर उतरेंगे मंत्री और अधिकारी, युवाओं से सीधा संवाद
सरकार अब शिक्षा व्यवस्था को केवल दफ्तरों से चलाने के बजाय जमीनी स्तर पर समझने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्री, विधायक, सांसद और संबंधित अधिकारी खुद स्कूल-कॉलेजों का दौरा करेंगे और छात्र-छात्राओं से सीधे बातचीत करेंगे। युवाओं से मिलने वाले सुझावों और समस्याओं को ऑनलाइन पोर्टल पर भी दर्ज किया जाएगा। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि छात्रों को वास्तव में किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार का लक्ष्य बिहार के युवाओं को शिक्षा, कौशल और अवसरों से जोड़ना है, ताकि उन्हें बेहतर पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े। इसके तहत राज्य में 1001 मॉडल स्कूल विकसित करने का भी लक्ष्य रखा गया है।









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