Bihar Flood: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) का परिसर इन दिनों बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब गया है। विश्वविद्यालय कैंपस में जमीन से चार फीट से अधिक पानी जमा है, जिसके चलते पढ़ाई और कार्यालयी कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कर्मचारी और अधिकारी भी नाव के सहारे विश्वविद्यालय पहुंचने को मजबूर हैं।
प्रशासनिक भवन के अंदर तक पानी घुस चुका है, जिससे ग्राउंड फ्लोर की एक दर्जन से अधिक शाखाओं में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लालबाग प्रोफेसर कॉलोनी की स्थिति तो और भी भयावह है, जहाँ जमीन से करीब पांच फीट ऊंचा पानी जमा है। यहाँ सरकारी क्वार्टरों में रहने वाले एक दर्जन से अधिक शिक्षकों को अपने घर छोड़कर किराए के मकानों या रिश्तेदारों के यहाँ शरण लेनी पड़ी है।
प्रशासनिक भवन में घुसा पानी, ठप हुए दफ्तर
TMBU कैंपस में चार फीट से अधिक पानी जमा होने के बाद विश्वविद्यालय का प्रशासनिक भवन भी इसकी चपेट में आ गया है। भवन के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित कई कार्यालयों में पानी घुस गया है, कुछ कमरों में तो करीब तीन फीट तक पानी भर गया है। इससे फाइलों और दूसरे जरूरी कामों को निपटाना असंभव हो गया है। कई कर्मचारी कुछ देर कार्यालय में रहने के बाद वापस घर लौट गए, क्योंकि पानी के बीच काम करने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
कर्मचारियों का कहना है कि जब कार्यालय के कमरों में पानी भरा है, तो वे बैठकर काम कहाँ करें। इस स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों ने बाढ़ के पानी के कारण छुट्टी देने की मांग की है।
विश्वविद्यालय परिसर में सड़क और रास्तों पर पानी जमा होने के कारण नाव ही आवाजाही का एकमात्र प्रमुख साधन बन गई है। जरूरी काम के लिए कुछ कर्मचारी नाव से विश्वविद्यालय पहुँचते हैं और काम पूरा करने के बाद उसी नाव से वापस लौटते हैं। यह स्थिति विश्वविद्यालय के सामान्य कामकाज पर बाढ़ के भयानक असर को साफ दिखाती है।
फाइलों पर मंडरा रहा खतरा, छात्र परेशान
बाढ़ का पानी सिर्फ कर्मचारियों की आवाजाही और कामकाज को ही प्रभावित नहीं कर रहा, बल्कि कार्यालयों में रखी महत्वपूर्ण फाइलों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। कर्मचारियों के अनुसार, कई शाखाओं की कुछ फाइलें पानी में गलने लगी हैं। स्थापना कार्यालय में पिछले दस दिनों से ताला लगा हुआ है, ऐसे में आशंका है कि वहाँ रखी महत्वपूर्ण फाइलें भी पानी की भेंट चढ़ गई होंगी। इन दस्तावेजों का खराब होना भविष्य में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है।
बाढ़ का सबसे सीधा असर उन छात्र-छात्राओं पर पड़ा है, जो अपने जरूरी दस्तावेज लेने विश्वविद्यालय पहुँचे थे। कैंपस में पानी भरने के कारण विश्वविद्यालय का काउंटर बंद रहा। डिग्री, माइग्रेशन, अंकपत्र और प्रोविजनल प्रमाण पत्र लेने के लिए दूर-दराज से आए विद्यार्थियों को बिना काम कराए वापस लौटना पड़ा। कई छात्रों के लिए विश्वविद्यालय तक पहुँचने में समय और पैसे खर्च हुए, लेकिन उनका काम नहीं हो सका।
प्रोफेसर कॉलोनी में 5 फीट पानी, शिक्षक बेघर
TMBU की लालबाग प्रोफेसर कॉलोनी में जलजमाव की स्थिति सबसे खराब है। यहाँ जमीन से करीब पांच फीट ऊंचा पानी जमा है, जिससे सरकारी क्वार्टरों में रहने वाले शिक्षकों के लिए सामान्य आवाजाही मुश्किल हो गई है। शिक्षक नाव के जरिए अपने क्वार्टरों से बाहर आ-जा रहे हैं। ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले एक दर्जन से अधिक शिक्षकों ने पानी की वजह से अपने घर छोड़ दिए हैं। इनमें से कुछ शिक्षक किराए के मकान में रह रहे हैं, जबकि कुछ ने अपने रिश्तेदारों के यहाँ शरण ली है। इन परिवारों के लिए यह सिर्फ आवाजाही की समस्या नहीं है, बल्कि घर छोड़कर अस्थायी रूप से दूसरी जगह रहना, जरूरी सामान की सुरक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती इस Bihar Flood के बीच जरूरी प्रशासनिक काम को जारी रखना है। एक तरफ कार्यालयों में पानी घुसा है, दूसरी तरफ कर्मचारी और अधिकारी नियमित तरीके से वहाँ पहुँच नहीं पा रहे हैं। छात्रों के काउंटर बंद हैं और कई शिक्षक अपने घर छोड़ चुके हैं। ऐसे में पानी घटने तक वैकल्पिक कार्यालय व्यवस्था, कर्मचारियों की सुरक्षा और विद्यार्थियों के जरूरी काम को प्राथमिकता देना अहम होगा। साथ ही, पानी उतरने के बाद कार्यालयों, फाइलों और अन्य संसाधनों को हुए नुकसान का आकलन भी करना पड़ेगा।







