Vaishali Boat Accident: बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर क्षेत्र में गंगा नदी में हुए दुखद नाव हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना में 13 बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद बिहार सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इसे ‘गंभीर लापरवाही’ का मामला बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। मंत्री यादव ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पर जोर दिया है।
वैशाली नाव हादसा: ‘आंखों के सामने गंगा में समा गए 9 भाई-बहन’, रामपुर गांव में पसरा मातम
Vaishali Boat Accident: बिहार के वैशाली जिले में हुए भीषण नाव हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। राघोपुर प्रखंड के रामपुर गांव में गंगा नदी में हुई इस दुर्घटना के बाद चारों ओर मातम पसरा है। इस दर्दनाक घटना ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं, गांव में हर तरफ चीख-पुकार सुनाई दे रही है।
इस वैशाली नाव हादसा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ही परिवार के नौ सदस्यों सहित कई लोगों की जान चली गई। किसी मां ने अपना बेटा खोया है, तो किसी ने अपनी बेटी। कई घरों के भाई-बहन और रिश्तेदार अब उनके बीच नहीं रहे। एक ग्रामीण ने बताया कि उनके ननिहाल के एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हुई है, जबकि एक अन्य घर के पांच लोग भी इस हादसे का शिकार हो गए।
एक ही परिवार के 9 सदस्य गंगा में समाए, गौतम ने बताई दर्दनाक कहानी
रामपुर गांव के एक युवक ने बताया कि उनके ननिहाल के परिवार से नौ लोग नाव पर सवार होकर एक भोज में शामिल होने जा रहे थे। इस समूह में उनके मामा के बेटे-बेटियां और एक मौसी भी शामिल थीं। गौतम के अनुसार, परिवार के कई सदस्य बच्चे और किशोर थे, जिनकी उम्र 16 से 18 वर्ष के आसपास थी, वहीं छोटे बच्चों की उम्र करीब 10 से 12 साल बताई गई है।
बताया, ‘मेरे ननिहाल के परिवार से नौ लोग नाव पर सवार होकर भोज खाने गये थे। इनमें मेरे मामा के बेटे-बेटियां और एक मौसी भी शामिल थीं। परिवार के कई सदस्य बच्चे और किशोर थे, कुछ की उम्र 16 से 18 वर्ष के आसपास थी, जबकि छोटे बच्चों की उम्र करीब 10 से 12 साल थी।’
परिजनों ने बताया कि बच्चे और अन्य लोग गांव के ही एक परिवार में आयोजित भोज में शामिल होने जा रहे थे, जिसके लिए उन्हें नाव से नदी पार करनी थी। नाव पर काफी संख्या में लोग सवार थे, करीब 25 से 30 लोग। हालांकि, नाव पर सवार लोगों की वास्तविक संख्या और हादसे के सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
स्कूल जाने वाले बच्चों की मौत से मातम, गांव में पसरा सन्नाटा
इस राघोपुर नाव हादसा में जान गंवाने वालों में कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं। परिजनों ने बताया कि कुछ बच्चे रोज स्कूल जाते थे। अब उनके घरों में सन्नाटा पसरा है और परिवारों के सामने अपनों को खोने का असहनीय दुख है। गांव में कई घरों के लोग अपने परिजनों की तलाश और शवों की पहचान को लेकर परेशान दिखे। माताओं की चीख-पुकार और परिवार के सदस्यों का विलाप माहौल को और भी गमगीन बना रहा था।
हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पहुंचे। जिला प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके का निरीक्षण कर रहे थे। नदी में डूबे लोगों के शवों को बरामद करने के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है। स्थानीय लोगों के लिए यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों के उजड़ जाने की त्रासदी बन गया है। गांव में लोग एक-दूसरे को सांत्वना देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अपनों को खोने का दर्द हर चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा है।
प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल: ‘गैरकानूनी’ परिचालन
मंत्री रामकृपाल यादव ने हादसे के बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि शाम के बाद नाव चलाने की अनुमति प्रशासन की ओर से नहीं होती है। इसके बावजूद नाव का परिचालन किया गया, जो पूरी तरह ‘गैरकानूनी’ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब निर्धारित समय के बाद नाव चलाने की अनुमति नहीं थी, तो आखिर नाव नदी में कैसे चली? इस मामले में संबंधित अधिकारियों और व्यक्तियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने हादसे को ‘बेहद दर्दनाक’ बताया और कहा कि गांव के बच्चे एक भोज में शामिल होने के लिए नाव से जा रहे थे, तभी गंगा नदी के बीच में नाव डूब गई।
“यह घटना गंभीर लापरवाही से जुड़ा मामला है। शाम होने के बाद प्रशासन की ओर से नाव चलाने की अनुमति नहीं होती, इसके बावजूद नाव चलाने की घटना सामने आई है। यह गैरकानूनी है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।”
नाव में छेद और लापरवाही के अन्य पहलू
हादसे के बाद नाव के संचालन और उसकी स्थिति को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। मंत्री यादव के अनुसार, ऐसी जानकारी सामने आई है कि डूबने वाली नाव में पहले से छेद था। यदि जांच में यह बात सही साबित होती है, तो नाव की सुरक्षा मानकों और उसे नदी में चलाने की अनुमति से जुड़े पहलुओं की गहन पड़ताल आवश्यक होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार लोगों की पहचान जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मुआवजे और भविष्य की रोकथाम पर जोर
रामकृपाल यादव ने जोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शासन को सख्ती बरतनी होगी। नदी में नाव चलाने के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो। मंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि दुर्घटना की जांच के साथ-साथ प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। इस बीच, संजय झा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस दुखद वैशाली नाव हादसे पर मन व्यथित होने की बात कहते हुए मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है।
अब देखना होगा कि इस गंभीर मामले में प्रशासन द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं और दोषियों पर कब तक कार्रवाई होती है।







