Copper: सोने और चांदी के बाद जिस धातु पर आज सबसे ज्यादा बहस हो रही है, वह है कॉपर, जिसे ‘डॉक्टर मेटल’ भी कहा जाता है। इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति, सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग ने कॉपर की वैश्विक जरूरत को विस्फोटक बना दिया है।
कॉपर: भविष्य की धातू जो बदल रही है दुनिया की तस्वीर
कॉपर की बढ़ती मांग और निवेश के अवसर
पेट्रोल कारों में जहां सिर्फ 20 किलोग्राम कॉपर का उपयोग होता है, वहीं एक इलेक्ट्रिक वाहन में यह मात्रा बढ़कर 80 किलोग्राम तक पहुंच जाती है। यह वृद्धि मुख्य रूप से हरित ऊर्जा संक्रमण और आधुनिक तकनीक के विस्तार के कारण है। हरित ऊर्जा के लक्ष्यों को प्राप्त करने और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कॉपर अब एक अनिवार्य घटक बन गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अनुमान है कि 2035 तक कॉपर की आपूर्ति में 30% की कमी आ सकती है, जिससे लंबी अवधि में इसकी कीमतें मजबूत बनी रह सकती हैं।
वर्तमान में, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कॉपर ₹1332 प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर यह $13,238 प्रति टन के स्तर पर है।
निवेश के लिए रणनीतिक विकल्प
निवेशकों के लिए Mirae Asset Nifty Metal ETF, iShares Copper & Metals Mining ETF और विभिन्न US कॉपर ETFs जैसे विकल्प उपलब्ध हैं, जो इस बढ़ती मांग से लाभ उठाने का अवसर प्रदान करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि कॉपर एक अस्थिर कमोडिटी है, इसलिए इसमें सोच-समझकर आवंटन करना आवश्यक है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/।
इस धातु का भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है, लेकिन निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव पर पैनी नज़र रखनी चाहिए। देशज टाइम्स बिहार का N0.1 आपको व्यापार और तकनीक की दुनिया से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर से अपडेट रखता है।







